नई दिल्ली। भारत और यूरोप के रिश्तों में नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी की “मदर ऑफ ऑल डील” कही जा रही यह संधि सिर्फ दस्तावेज नहीं, बल्कि आने वाले दशकों की आर्थिक दिशा तय करने वाली डील मानी जा रही है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच होने वाला मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) मंगलवार को औपचारिक रूप से साइन किया जाएगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे मदर ऑफ ऑल डील करार दिया है।
दिल्ली के हैदराबाद हाउस में होने वाली बैठक में दोनों पक्षों के नेता मौजूद रहेंगे। इस समझौते के तहत 97 से 99 प्रतिशत सेक्टरों को शामिल किया गया है, जबकि 90 प्रतिशत से अधिक उत्पादों पर आयात शुल्क कम या खत्म किया जाएगा। पीएम मोदी ने भारत ऊर्जा सप्ताह कार्यक्रम में कहा कि यह समझौता भारत-ब्रिटेन ट्रेड डील का पूरक साबित होगा और इससे मैन्युफैक्चरिंग, सेवाओं और निर्यात को जबरदस्त बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने यह भी बताया कि भारत जल्द ही दुनिया का सबसे बड़ा ऑयल रिफाइनिंग हब बनेगा।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल के मुताबिक, समझौता संतुलित और भविष्य को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। सेवा क्षेत्र में टेलीकॉम, ट्रांसपोर्ट, अकाउंटिंग और ऑडिटिंग जैसे सेक्टरों को फायदा मिलेगा। वहीं टेक्सटाइल, रत्न-आभूषण, लेदर और फुटवियर जैसे श्रम-गहन उद्योगों को यूरोप में ड्यूटी-फ्री या प्राथमिकता पहुंच मिल सकती है।
हालांकि कृषि और डेयरी जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को इससे बाहर रखा गया है, ताकि भारतीय किसानों और डेयरी उद्योग को नुकसान न पहुंचे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को वैश्विक सप्लाई चेन में और मजबूत करेगा।
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