भोपाल: महात्मा गांधी का भोपाल से भी खास रिश्ता रहा है। करीब 97 साल पहले सितंबर 1929 में बापू पहली बार भोपाल आए थे। उस समय भोपाल एक नवाबी रियासत थी और नवाब हमीदुल्ला खान यहां के शासक थे। बापू की इस यात्रा को लेकर कई दिलचस्प किस्से आज भी भोपाल के इतिहास में दर्ज हैं। खास तौर पर बेनजीर मैदान, जहां उन्होंने एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया था।
इतिहासकार खालिद गनी के मुताबिक महात्मा गांधी उस समय देश की कई रियासतों का दौरा कर चुके थे, लेकिन भोपाल नहीं आए थे। भोपाल के नवाब हमीदुल्ला खान चाहते थे कि गांधी भोपाल आएं। इसके लिए लंबे समय तक कोशिश की गई। बताया जाता है कि सरोजिनी नायडू ने भी गांधी की भोपाल यात्रा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
बापू को भोपाल बुलाने के लिए हुई थीं कई कोशिशें
महात्मा गांधी को यह संदेश भी पहुंचाया गया था कि भोपाल रियासत में बड़ी मात्रा में खादी खरीदी गई है। गांधी के चिकित्सक डॉ. एमए अंसारी का भी इस यात्रा से संबंध बताया जाता है। नवाब हमीदुल्ला खान ने उन्हें भोपाल रियासत का आधिकारिक डॉक्टर बनाया था। इसके पीछे एक उद्देश्य गांधी को भोपाल आने के लिए तैयार करना भी माना जाता है।
आखिरकार सितंबर 1929 में वह मौका आया, जब महात्मा गांधी भोपाल पहुंचे। बापू 8 से 10 सितंबर तक यहां रहे। उनके साथ कस्तूरबा गांधी और मीरा बेन भी थीं।
खादी से सजाई गई थी राहत मंजिल
भोपाल पहुंचने पर महात्मा गांधी को राहत मंजिल में ठहराया गया था। यह अहमदाबाद पैलेस के पास स्थित नवाबी परिवार का गेस्ट हाउस हुआ करता था। बापू के स्वागत में राहत मंजिल को खादी से सजाया गया था।
यहां प्रार्थना सभा भी हुई, जिसमें महात्मा गांधी के साथ कस्तूरबा गांधी और मीरा बेन ने हिस्सा लिया। इस यात्रा को इसलिए भी खास माना जाता है क्योंकि गांधी भोपाल रियासत में सरकारी मेहमान के रूप में ठहरे थे।
बेनजीर मैदान में हुई थी बड़ी सभा
10 सितंबर 1929 को महात्मा गांधी ने बेनजीर मैदान में एक बड़ी जनसभा को संबोधित किया। यह मैदान उस समय बेनजीर महल परिसर से जुड़ा हुआ था। बड़ी संख्या में लोग गांधी को देखने और सुनने पहुंचे थे। इसी वजह से बेनजीर मैदान का नाम गांधी की भोपाल यात्रा के इतिहास से जुड़ा हुआ है। लंबे समय से शहर के कुछ इतिहासकार और नागरिक इस स्थान पर गांधी की पहली भोपाल यात्रा की याद में स्मारक बनाने की मांग करते रहे हैं।
इतिहासकारों का कहना है कि यहां पर्याप्त जगह मौजूद है और यह स्थान गांधी की ऐतिहासिक यात्रा की यादों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का माध्यम बन सकता है।
गांधी की वापसी की जानकारी रखी गई थी गुप्त
गांधी की भोपाल यात्रा से जुड़ा एक और दिलचस्प किस्सा उनकी वापसी का है। बताया जाता है कि नवाब हमीदुल्ला खान चाहते थे कि गांधी किस ट्रेन से और किस समय भोपाल से रवाना होंगे, इसकी जानकारी ज्यादा लोगों तक न पहुंचे। यहां तक कि प्लेटफॉर्म और ट्रेन से जुड़ी जानकारी भी गुप्त रखी गई थी।
10 सितंबर को जब गांधी अपनी तीन दिन की यात्रा पूरी कर स्टेशन की ओर जा रहे थे, तब रास्ते में गुजराती मोढ समाज के लोगों ने उनका सम्मान किया। समाज की ओर से हरिजन फंड के लिए 501 रुपये की राशि भी भेंट की गई थी। उस समय 501 रुपये एक बड़ी रकम मानी जाती थी।
1933 में फिर भोपाल स्टेशन पहुंचे थे बापू
महात्मा गांधी का भोपाल से जुड़ा एक और किस्सा 1933 का है। उस समय गांधी हरिजन यात्रा पर निकले थे। उनकी ट्रेन कुछ समय के लिए भोपाल रेलवे स्टेशन पर रुकी थी। बताया जाता है कि प्रभात फेरी निकाल रहे लोगों को जैसे ही गांधी के स्टेशन पर होने की जानकारी मिली, खबर पूरे शहर में फैल गई। बड़ी संख्या में लोग रेलवे स्टेशन पहुंच गए। गांधी ने वहां मौजूद लोगों को संबोधित किया और हरिजन कार्यों के लिए दान देने की अपील की।
इसी दौरान एक छोटी बच्ची ने अपनी अंगूठी गांधी को दान में देने की कोशिश की थी। यह घटना भी भोपाल में गांधी से जुड़ी यादों का हिस्सा बन गई।
आज भी राहत मंजिल, बेनजीर महल और बेनजीर मैदान महात्मा गांधी की उस ऐतिहासिक भोपाल यात्रा की याद दिलाते हैं। इनमें बेनजीर मैदान का महत्व इसलिए सबसे अलग है, क्योंकि यहीं 10 सितंबर 1929 को बापू ने भोपाल की जनता को संबोधित किया था। इसी इतिहास को देखते हुए इस स्थान पर गांधी स्मारक बनाए जाने की मांग समय-समय पर उठती रही है।

