नई दिल्ली। मेघालय के बहुचर्चित हनीमून मर्डर केस में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को बड़ा झटका लगा है। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी जमानत रद्द करते हुए निचली अदालत और मेघालय हाई कोर्ट द्वारा पारित जमानत आदेशों से जुड़े सभी दस्तावेज और रिकॉर्ड तलब किए हैं। शीर्ष अदालत ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह मामला गंभीर अपराध से जुड़ा है और जमानत दिए जाने की प्रक्रिया का न्यायिक परीक्षण आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट को निर्देश दिए हैं कि जमानत आदेश, केस डायरी से संबंधित दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड निर्धारित समय के भीतर पेश किए जाएं। अदालत अब यह जांच करेगी कि गंभीर आपराधिक मामले में जमानत किन कानूनी आधारों पर दी गई थी।
क्या है पूरा मामला?
बता दें यह मामला इंदौर निवासी ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी की हत्या से जुड़ा है। राजा रघुवंशी की शादी मई 2025 में सोनम रघुवंशी से हुई थी। शादी के कुछ ही दिनों बाद दोनों हनीमून मनाने मेघालय की राजधानी शिलांग पहुंचे थे। हनीमून के दौरान राजा रघुवंशी अचानक लापता हो गए। कई दिनों तक चली तलाश के बाद उनका शव शिलांग के पास एक गहरी खाई से बरामद हुआ। पोस्टमार्टम और पुलिस जांच में हत्या की पुष्टि हुई।
मामले की जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने सोनम रघुवंशी को मुख्य आरोपी बनाया और आरोप लगाया कि हत्या एक सुनियोजित साजिश के तहत कराई गई थी। इस सनसनीखेज घटना ने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींचा और इसे “हनीमून मर्डर केस” के नाम से जाना जाने लगा।
जांच में क्या सामने आया?
मेघालय पुलिस की जांच के दौरान कई अहम साक्ष्य सामने आने का दावा किया गया। पुलिस के अनुसार हत्या की साजिश पहले से रची गई थी और इसके लिए कथित तौर पर अन्य लोगों की भी मदद ली गई थी। जांच एजेंसी ने इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य, कॉल डिटेल, लोकेशन और अन्य तकनीकी सबूतों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की। पुलिस ने मामले में चार्जशीट भी पेश की, जिसमें सोनम रघुवंशी को मुख्य आरोपी बताया गया।
कैसे मिली थी जमानत?
जानकारी अनुसरा, मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब गिरफ्तारी से जुड़े दस्तावेजों में गंभीर तकनीकी त्रुटि सामने आई। पुलिस द्वारा तैयार किए गए Arrest Memo में हत्या से संबंधित धारा का उल्लेख करने के बजाय भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 403 लिख दी गई, जो संपत्ति के बेईमानी से दुरुपयोग से संबंधित प्रावधान है। इसी तकनीकी आधार को देखते हुए निचली अदालत ने अप्रैल 2026 में सोनम रघुवंशी को जमानत दे दी।
हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखी थी जमानत
वहीं निचली अदालत के फैसले के खिलाफ मेघालय सरकार ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर जमानत रद्द करने की मांग की थी। राज्य सरकार का कहना था कि तकनीकी त्रुटि के कारण गंभीर अपराध के आरोपी को राहत मिल गई। हालांकि मेघालय हाई कोर्ट ने राज्य सरकार की दलीलों से सहमति नहीं जताई और निचली अदालत द्वारा दी गई जमानत को बरकरार रखा।
सुप्रीम कोर्ट क्यों पहुंची मेघालय सरकार?
हाई कोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद मेघालय सरकार ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की। याचिका में कहा गया कि हत्या जैसे गंभीर अपराध में केवल तकनीकी गलती के आधार पर जमानत देना न्याय के हित में नहीं है। सरकार ने यह भी तर्क दिया कि यदि ऐसे मामलों में तकनीकी त्रुटियों को आधार बनाकर राहत दी जाएगी तो इससे आपराधिक न्याय प्रणाली पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान जमानत आदेशों पर गंभीर सवाल उठाए और सोनम रघुवंशी की जमानत रद्द कर दी। साथ ही अदालत ने निचली अदालत और हाई कोर्ट द्वारा पारित जमानत आदेशों से जुड़े सभी रिकॉर्ड और दस्तावेज तलब कर लिए। शीर्ष अदालत अब यह जांच करेगी कि जमानत देते समय सभी कानूनी पहलुओं और उपलब्ध साक्ष्यों पर समुचित विचार किया गया था या नहीं।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सोनम रघुवंशी को मिली जमानत समाप्त हो गई है। अब मामले की सुनवाई शीर्ष अदालत की निगरानी में आगे बढ़ेगी। रिकॉर्ड की समीक्षा के बाद अदालत आवश्यक निर्देश जारी करेगी। वहीं मेघालय पुलिस द्वारा दर्ज हत्या के मामले में ट्रायल की कार्रवाई भी जारी रहेगी।

