भोपाल। सरकारी योजनाओं की रफ्तार अब फाइलों से नहीं, डेटा से तय होगी। मध्य प्रदेश सरकार अपने स्टेट डेटा सेंटर को पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जोड़कर डिजिटल गवर्नेंस को नई ऊंचाई देने की तैयारी में है।
मध्य प्रदेश के स्टेट डेटा सेंटर को जल्द ही प्रधानमंत्री गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इस कदम से केंद्र और राज्य सरकार के बीच रियल टाइम डेटा शेयरिंग संभव होगी, जिससे योजनाओं की प्लानिंग, मॉनिटरिंग और क्रियान्वयन अधिक प्रभावी हो सकेगा।
इसको लेकर मुख्य सचिव अनुराग जैन और आईटी विभाग के प्रमुख सचिव एल. सेलवेंद्रन ने भोपाल स्थित स्टेट डेटा सेंटर का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने सर्वर क्षमता, सुरक्षा व्यवस्था और बैकअप सिस्टम की समीक्षा की।
मुख्य सचिव ने डेटा सेंटर की स्टोरेज क्षमता बढ़ाने के लिए विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए हैं। उनका कहना है कि भविष्य में योजनाओं से जुड़ा भारी डेटा संग्रहित होगा, जिसके लिए आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर जरूरी है।
गति शक्ति प्लेटफॉर्म के जरिए सड़क, रेल, बिजली, पानी, उद्योग और शहरी विकास से जुड़ी परियोजनाओं की जानकारी एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध रहेगी। इससे विभागों के बीच तालमेल बेहतर होगा और परियोजनाओं में देरी कम होगी।
सरकार का दावा है कि क्षमता बढ़ने के बाद एमपी का स्टेट डेटा सेंटर राष्ट्रीय स्तर पर भी अन्य राज्यों को तकनीकी सहयोग दे सकेगा। डिजिटल इंडिया मिशन के तहत यह कदम प्रदेश को तकनीकी रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
एमपी का डेटा होगा ‘डिजिटल हथियार’, पीएम गति शक्ति से जुड़ेगा स्टेट डेटा सेंटर


