नई दिल्ली: बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने गूगल, फेसबुक और एक्स समेत सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया कंपनियां भारत से बड़ी कमाई करती हैं, लेकिन कंटेंट मॉडरेशन और जवाबदेही के मामलों में पर्याप्त पारदर्शिता नहीं दिखातीं।
निशिकांत दुबे ने मंगलवार को संसद परिसर में कहा कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म भारत से भारी राजस्व कमाते हैं, लेकिन टैक्स और जवाबदेही के मुद्दों पर उन्हें अधिक स्पष्टता दिखानी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ प्लेटफॉर्म ऐसे कंटेंट को बढ़ावा दे रहे हैं, जो देश और लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंता का विषय बन सकता है।
प्लेटफॉर्म्स से मांगा जवाब
बीजेपी सांसद ने सोशल मीडिया पर अलग-अलग संगठनों और राजनीतिक दलों के कंटेंट व्यूज का जिक्र करते हुए कहा कि कुछ नए संगठनों और आंदोलनों को कम समय में बड़ी संख्या में व्यूज मिल रहे हैं। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कंटेंट की पहुंच और वायरल होने की प्रक्रिया किस आधार पर तय होती है। उन्होंने प्लेटफॉर्म्स की एल्गोरिदम व्यवस्था और पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए।
सोशल मीडिया कंपनियों पर लगाए गंभीर आरोप
निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म कई बार आपत्तिजनक और संवेदनशील कंटेंट को रोकने में विफल रहते हैं। उन्होंने कहा कि इन प्लेटफॉर्म्स को चाइल्ड सेफ्टी, फेक कंटेंट और भ्रामक जानकारी जैसे मुद्दों पर ज्यादा प्रभावी कदम उठाने चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सोशल मीडिया कंपनियों को यह जानकारी देनी चाहिए कि उनके प्लेटफॉर्म पर कितने यूजर्स किस तरह की तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं और कंटेंट की पहुंच कैसे बढ़ रही है।
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सेफ हार्बर नीति पर भी उठे सवाल
निशिकांत दुबे ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम 2000 के तहत मिलने वाले सेफ हार्बर प्रावधान पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि बदलते डिजिटल दौर में इस कानूनी सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत हो सकती है।
क्या है सेफ हार्बर?
सेफ हार्बर एक कानूनी सुरक्षा व्यवस्था है, जिसके तहत सोशल मीडिया कंपनियों को यूजर्स द्वारा पोस्ट किए गए थर्ड पार्टी कंटेंट के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया जाता। हालांकि, सरकार के नियमों के अनुसार उन्हें आपत्तिजनक या गैरकानूनी कंटेंट पर कार्रवाई करनी होती है।
निशिकांत दुबे के बयान के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स की भूमिका, कंटेंट नियंत्रण, डिजिटल पारदर्शिता और यूजर डेटा से जुड़े मुद्दों पर बहस तेज हो गई है। आने वाले समय में डिजिटल कंपनियों की जवाबदेही को लेकर नीतिगत बदलावों पर भी चर्चा बढ़ सकती है।

