नई दिल्ली: देश में बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस के वाहन चलाने वालों के लिए बड़ी खबर है। सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ऐसा पायलट प्रोजेक्ट तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसके तहत बिना वैध थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाले वाहनों को पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। अदालत का उद्देश्य सड़क सुरक्षा बढ़ाना और मोटर वाहन कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करना है।
नई गाड़ियों के लिए बढ़ी अनिवार्य बीमा अवधि
सुप्रीम कोर्ट ने नई गाड़ियों के लिए थर्ड-पार्टी मोटर इंश्योरेंस की अनिवार्य अवधि भी बढ़ा दी है। अब नई कार खरीदने पर 4 साल और नए दोपहिया वाहन खरीदने पर 6 साल का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस अनिवार्य होगा। इससे दुर्घटना की स्थिति में पीड़ितों को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सकेगी।
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बिना बीमा वाले वाहनों पर होगी कार्रवाई
सड़क दुर्घटना मुआवजा मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बिना इंश्योरेंस वाले वाहनों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। ऐसे वाहनों का चालान काटने और नियमों का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश भी दिए गए हैं।
देश में 56% वाहन बिना बीमा
सुप्रीम कोर्ट ने वित्त संबंधी स्थायी समिति (2024-25) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में करीब 30.48 करोड़ पंजीकृत वाहनों में से लगभग 16.54 करोड़, यानी 56 प्रतिशत वाहनों के पास वैध मोटर इंश्योरेंस नहीं है। इनमें बड़ी संख्या ऐसे वाहनों की भी हो सकती है, जिनका बीमा समाप्त हो चुका है।
वाहन मालिकों के लिए क्या है सलाह?
यदि आपकी कार या बाइक का थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस समाप्त हो चुका है, तो उसे जल्द से जल्द नवीनीकृत कराना जरूरी है। भविष्य में नियम लागू होने पर बिना बीमा वाले वाहन चालकों को चालान, कानूनी कार्रवाई और पेट्रोल-डीजल मिलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
क्या होगा असर?
यदि केंद्र सरकार इस पायलट प्रोजेक्ट को लागू करती है, तो बिना थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस वाले वाहनों की पहचान कर उन्हें पेट्रोल-डीजल देने पर रोक लगाई जा सकती है। इससे वाहन मालिकों में बीमा कराने के प्रति जागरूकता बढ़ने और सड़क दुर्घटना पीड़ितों को समय पर मुआवजा मिलने की संभावना मजबूत होगी।

