किसानों की समस्या को उजागर करती तस्वीर, खाद की लाइन में किसान की मौत

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टीकमगढ़। बड़ौरा घाट स्थित सरकारी यूरिया‑खाद वितरण केंद्र पर लाइन में खड़े किसान जमुना कुशवाहा (लगभग 50‑52 वर्ष) की अचानक तबियत बिगड़ गई। लंबे इंतज़ार और भूखे‑प्यासे लाइन में खड़े रहने के बाद उन्हें चक्कर, उल्टी और पसीना आने लगा। तत्काल उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कारण “हार्ट अटैक” बताया गया है।

भूख, प्यास और निराशा

पुलिस और परिजनों के अनुसार जमुना पिछले तीन दिनों से खाद लेने के लिए बड़ौरा घाट केंद्र आ रहे थे। परंतु खाद की कमी और वितरण व्यवस्था की खराबी के कारण उन्हें बार‑बार खाली हाथ लौटना पड़ा। सोमवार सुबह बिना कुछ खाए‑पिए ही वह लाइन में खड़े हो गए थे। लंबे इंतजार और तनाव ने उनकी सेहत पर भारी पड़ा।  

किसान के हालात  

जमुना कुशवाहा की मौत ने केवल एक परिवार को ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के किसानों के साथ हो रही अन्याय और उपेक्षा की तस्वीर को उजागर कर दिया है। खाद‑आपूर्ति संकट, असंगठित वितरण प्रक्रिया और वर्षों से अनसुनती रही किसानों की आवाज़ को उजागर कर दिया है। यह घटना तमाम मुद्दों का प्रतीक बन गई है।