सामाजिक न्याय का आधार है भारतीय संविधानः मंत्री कुशवाहा

दिल मांगे मोर की आदत सामाजिक न्याय में बाधक- संघ चालक श्री पांडे
भोपाल।संस्कार भारती द्वारा भारतीय संविधान और सामाजिक न्याय विषय पर सरोजिनी नायडू कन्या महाविद्यालय में संगोष्ठी आयोजित की गई। जिसमें सामाजिक न्याय विभाग मंत्री श्री नारायण सिंह कुशवाहा ने कहा कि भारतीय संविधान देश के सभी नागरिकों को स्वतंत्रता और अभिव्यक्ति की आजादी के साथ समान अधिकार देता है। उन्होंने कहा कि भारतीय संविधान केवल दस्तावेज नहीं बल्कि भारत की आत्मा और मूल्यों का प्रतिबिंब है जो हम सभी को समानता और सामाजिक न्याय देता है। हर जाति धर्म भाषा और क्षेत्र के व्यक्ति को सामान अवसर और सम्मान भारतीय संविधान की देन है।
उन्होंने बताया कि युवाओं में अधिकार के साथ कर्तव्य का ज्ञान होना भी जरूरी है। मंत्री श्री कुशवाहा ने कहा कि सरकार बिना किसी भेदभाव के समाज के अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक समान रूप से स्वास्थ्य शिक्षा और रोजगार की योजना बनाकर सामाजिक न्याय का काम कर रही है। उन्होंने मंच से नशे की बढ़ती प्रवृत्ति पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं से अपील की कि वह नशे से खुद भी दूर रहें और अपने साथियों को भी नशे की लत से बचाए क्योंकि स्वस्थ समाज से ही देश विकसित राष्ट्र की ओर अग्रसर होगा। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित मध्य भारत प्रांत के संघसंचालक एवं पूर्व न्यायाधीश श्री अशोक पांडे जी ने बताया कि संविधान हमें अधिकार देता है लेकिन कर्तव्य का बोध संस्कारों से आता है। उन्होंने संविधान बनने के पीछे की कहानी बताते हुए कहा कि पहले जहां लोग परोपकार की भावना रखते थे वहीं आज दिल मांगे मोर की आदत ने सामाजिक न्याय की अवधारणा को कमजोर किया है।
दिव्यांग छात्राओं से मंत्री मिले 
कार्यक्रम के बाद मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा दर्शक दीर्घा में बैठी दिव्यांग छात्राओं के बीच पहुंचे। उन्होंने स्टूडेंट्स से बातचीत करते हुए किसी भी जरूरत के लिए बेहिचक अपनी बात रखने के लिए बोला। इस दौरान कॉलेज परिसर में दिव्यांगजनों के लिए होने वाली गतिविधियों के संबंध में भी छात्राओं और कॉलेज प्रबंधन से जानकारी ली।
भिक्षुगृह की जल्द सुधरेंगी व्यवस्थाएं
मीडिया से बात करते हुए एक सवाल के जवाब में मंत्री नारायण सिंह कुशवाहा ने कहा कि भोपाल में चल रहे भिक्षुग्रह का मामला मेरे संज्ञान में आया है। यहां चल रही अनियमितताओं को ठीक करने के लिए मैं आज ही विभागीय अधिकारियों को निर्देशित करूंगा। भिक्षुओं को भोजन आवास और पुनर्वास की सुविधाएं देकर उन्हें मुख्य धारा में जोड़ा जाएगा।