दिल्ली। रोजगार की तलाश में दिल्ली आए बिहार के समस्तीपुर निवासी बिरजू कुमार की मौत ने एक पूरे परिवार की दुनिया उजाड़ दी। रोहिणी के बेगमपुर इलाके में खुले मेनहोल में गिरकर 30 वर्षीय बिरजू की दर्दनाक मौत हो गई। वह परिवार का इकलौता कमाने वाला था और कुछ ही दिनों में गांव लौटने की तैयारी कर रहा था।
बेहतर भविष्य का सपना अधूरा रह गया
जानकारी अनुसार, बिरजू पिछले आठ महीनों से दिल्ली में मजदूरी कर रहा था। सेंटरिंग का काम करके वह किसी तरह बूढ़ी मां, पत्नी और तीन छोटे बच्चों का पेट पाल रहा था। गांव लौटने से पहले उसने बच्चों और पत्नी के लिए कपड़े भी खरीदे थे, लेकिन घर पहुंचने से पहले ही एक खुले मेनहोल ने उसकी जिंदगी छीन ली।
घंटों की मशक्कत के बाद मिला शव
दरअसल मंगलवार शाम करीब 7:45 बजे पुलिस और फायर ब्रिगेड को हादसे की सूचना मिली। कई घंटे की मशक्कत के बाद बिरजू का शव मेनहोल से बाहर निकाला गया और पोस्टमार्टम के लिए अंबेडकर अस्पताल भेजा गया।
गांव में बुझ गया घर का चिराग
बिरजू की मौत के बाद समस्तीपुर के सादीपुर बथनाहा गांव में मातम पसरा है। घर में चूल्हा नहीं जला और परिजन रो-रोकर बेहाल हैं। पत्नी सुचिता देवी का कहना है- वो हमारे लिए ही जी रहा था, अब बच्चों को कैसे पालेंगे? उसके तीन बच्चे—आयुष (8), आर्यन (5) और रीया (3) अब अपने पिता के बिना भविष्य की अनिश्चितता से जूझ रहे हैं।
बता दें बिरजू के पिता की मौत तब हो गई थी जब वह सिर्फ 10 साल का था। मां गीता देवी ने मजदूरी कर उसे पाला-पोसा। अब वही मां अपने जवान बेटे की मौत से टूट चुकी है। गांव वालों का कहना है कि मां के सामने बेटे की मौत से बड़ा दुख कुछ नहीं हो सकता।
ग्रामीणों का आरोप: लापरवाही ने ली जान
वहीं ग्रामीणों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अगर मेनहोल ढका होता तो आज बिरजू जिंदा होता। लोगों का मानना है कि शहर बनाने वाले मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सरकार गंभीर नहीं है।
परिवार ने दिल्ली और बिहार सरकार से आर्थिक सहायता की मांग की है, ताकि बच्चों की पढ़ाई और घर का खर्च चल सके। पोस्टमार्टम के बाद बिरजू का शव गांव लाया जाएगा और अंतिम संस्कार किया जाएगा।


