इटली। भारत और इटली के रिश्तों में इस बार मिठास घोलने का काम किसी बड़े समझौते ने नहीं, बल्कि एक छोटी सी चॉकलेटी टॉफी ने किया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को भारत की आइकॉनिक मेलोडी टॉफी गिफ्ट की, जिसके बाद सोशल मीडिया पर यह टॉफी फिर से ट्रेंड करने लगी। 80 और 90 के दशक के बच्चों की फेवरेट रही मेलोडी अब इंटरनेशनल चर्चा का हिस्सा बन चुकी है। गोल्डन-ब्राउन रैपर में आने वाली यह टॉफी सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि करोड़ों भारतीयों की यादों और बचपन से जुड़ी भावनाओं का हिस्सा मानी जाती है।
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1983 में शुरू हुआ था मेलोडी का सफर
बता दें मेलोडी टॉफी भारत की मशहूर कंपनी Parle Products का लोकप्रिय ब्रांड है। इसे साल 1983 में लॉन्च किया गया था। उस दौर में असली चॉकलेट हर बच्चे की पहुंच में नहीं होती थी, ऐसे में पारले ने कम कीमत में चॉकलेट जैसा स्वाद देने के लिए मेलोडी को बाजार में उतारा। धीरे-धीरे यह टॉफी बच्चों से लेकर बड़ों तक की पसंद बन गई। आज भी मेलोडी की कीमत बेहद कम है, लेकिन इसका क्रेज पहले जैसा ही बरकरार है। छोटे दुकानों से लेकर बड़े सुपरमार्केट तक, हर जगह इसकी मौजूदगी दिखाई देती है।
क्या बनाता है मेलोडी को इतना खास?
मेलोडी का स्वाद बाकी टॉफियों से बिल्कुल अलग माना जाता है। इसकी बाहरी परत मुलायम कैरेमल से बनी होती है, जबकि अंदर गाढ़ी चॉकलेट फिलिंग दी जाती है। यही डबल लेयर कॉम्बिनेशन इसे बेहद यूनिक बनाता है। जब यह टॉफी मुंह में घुलती है, तो कैरेमल और चॉकलेट का मिश्रण ऐसा फ्लेवर देता है, जिसे लोग सालों बाद भी भूल नहीं पाते। यही वजह है कि आज भी कई लोग इसे ‘चाइल्डहुड फ्लेवर’ के नाम से याद करते हैं।
मेलोडी को सबसे ज्यादा पॉपुलर बनाने में उसकी एड कैंपेन की बड़ी भूमिका रही। मेलोडी इतनी चॉकलेटी क्यों है? यह लाइन भारतीय विज्ञापन इतिहास की सबसे यादगार टैगलाइन में गिनी जाती है। दिलचस्प बात यह थी कि विज्ञापन कभी इसका सीधा जवाब नहीं देता था। आखिर में बस एक लाइन आती थी-‘मेलोडी खाओ, खुद जान जाओ।’ यही सस्पेंस और जिज्ञासा लोगों को इसे खरीदने के लिए मजबूर करती थी।
फिल्मों और सोशल मीडिया में भी कायम है क्रेज
मेलोडी सिर्फ एक कैंडी नहीं रही, बल्कि पॉप कल्चर का हिस्सा बन गई। बॉलीवुड फिल्मों से लेकर सोशल मीडिया मीम्स तक, इसका जिक्र लगातार होता रहा है। Chhichhore में भी इसकी टैगलाइन इस्तेमाल की गई थी, जिसने एक बार फिर लोगों को पुरानी यादों में पहुंचा दिया। अब पीएम मोदी द्वारा इसे इंटरनेशनल लेवल पर गिफ्ट किए जाने के बाद लोग इसे ‘इंडियन सॉफ्ट पावर’ और ‘स्वीट डिप्लोमेसी’ का नया उदाहरण बता रहे हैं।
आज बाजार में सैकड़ों चॉकलेट और कैंडी ब्रांड मौजूद हैं, लेकिन मेलोडी का अलग फैन बेस अब भी कायम है। इसकी खुशबू, टेक्सचर और क्लासिक टेस्ट लोगों को सीधे उनके बचपन में ले जाता है। यही वजह है कि दशकों बाद भी यह टॉफी भारतीय बाजार में अपनी मजबूत पहचान बनाए हुए है।

