लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र में संभल हिंसा पर गठित न्यायिक जांच आयोग की 369 पन्नों की रिपोर्ट पेश कर दी गई है। आयोग ने अपनी जांच में घटना को पूर्व नियोजित बताया है और कहा है कि मस्जिद सर्वे को लेकर फैलाई गई भ्रामक सूचनाओं के कारण हालात बिगड़े, जिसके बाद हिंसा हुई। रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है।
विधानसभा में पेश हुई आयोग की रिपोर्ट
बता दें प्रदेश सरकार ने विधानसभा में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि आयोग ने सभी दस्तावेजों, साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अपनी जांच पूरी की है। सरकार का कहना है कि रिपोर्ट में जिन लोगों की भूमिका का उल्लेख किया गया है, उनके संबंध में आगे की कार्रवाई कानून के अनुसार की जाएगी।
रिपोर्ट में क्या कहा गया है?
आयोग के मुताबिक, 24 नवंबर 2024 को अदालत के आदेश पर शाही जामा मस्जिद में सर्वे की प्रक्रिया चल रही थी। इसी दौरान बड़ी संख्या में लोग मौके पर एकत्र हुए। जांच में यह निष्कर्ष सामने आया कि सर्वे को लेकर गलत और भ्रामक जानकारी फैलने से तनाव बढ़ा और बाद में हिंसा भड़क गई।
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कुछ जनप्रतिनिधियों का भी हुआ उल्लेख
जानकारी के अनुसार, रिपोर्ट में सांसद जिया-उर-रहमान बर्क और विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहेल इकबाल समेत कुछ अन्य लोगों का उल्लेख किया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि यह उल्लेख जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और बयानों के आधार पर किया गया है। किसी भी व्यक्ति की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण संबंधित जांच एजेंसियों और न्यायिक प्रक्रिया के तहत होगा।
हिंसा में चार लोगों की मौत, कई पुलिसकर्मी घायल
आयोग की रिपोर्ट के अनुसार, हिंसा के दौरान पथराव, आगजनी और फायरिंग की घटनाएं हुईं। इसमें चार लोगों की मौत हुई, जबकि 28 पुलिसकर्मी घायल हुए। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि मृतकों को लगी गोलियां पुलिस के हथियारों से नहीं चली थीं। साथ ही सरकारी हथियार और अन्य सामान छीनने की कोशिश का भी उल्लेख किया गया है।
भविष्य के लिए आयोग की सिफारिशें
वहीं रिपोर्ट में संवेदनशील मामलों में अफवाहों पर तत्काल नियंत्रण, अदालतों के आदेशों का सम्मान, प्रशासन और आमजन के बीच बेहतर संवाद तथा कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने जैसी कई सिफारिशें की गई हैं। अब सरकार और संबंधित एजेंसियां आयोग की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर निर्णय लेंगी।

