वॉशिंगटन: अमेरिका में तेजी से फैल रहा Candida Auris (कैंडिडा ऑरिस) एक बार फिर स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (CDC) के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 25 जुलाई तक अमेरिका के 27 राज्यों में इस खतरनाक फंगस के 3,437 मामले दर्ज किए जा चुके हैं। पिछले वर्ष यह संख्या 4,290 थी। सबसे अधिक मामले कैलिफोर्निया (873) में सामने आए हैं, जबकि टेक्सास (433) और टेनेसी (283) दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं।
CDC का कहना है कि मामलों में बढ़ोतरी जारी है, लेकिन 2022 के बाद संक्रमण बढ़ने की रफ्तार कुछ धीमी हुई है। इसके बावजूद डॉक्टरों और मेडिकल एक्सपर्ट्स की चिंता कम नहीं हुई है, क्योंकि यह फंगस कई एंटीफंगल दवाओं पर असर नहीं होने देता और इसका प्रभावी इलाज अभी भी सीमित है। यही वजह है कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इसे ‘क्रिटिकल प्रायोरिटी फंगल पैथोजन’ की सूची में शामिल किया है।
कैंडिडा ऑरिस एक ऐसा ड्रग-रेजिस्टेंट यीस्ट फंगस है, जो मुख्य रूप से अस्पतालों, ICU और हेल्थकेयर सेंटरों में भर्ती गंभीर मरीजों को अपना शिकार बनाता है। यह संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क, दूषित मेडिकल उपकरणों और अस्पताल की सतहों के माध्यम से तेजी से फैल सकता है। खास बात यह है कि यह फंगस सतहों पर लंबे समय तक जीवित रह सकता है, जिससे अस्पतालों में संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
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वैज्ञानिकों के अनुसार, यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) को कमजोर करने का काम करता है। सामान्यतः शरीर की व्हाइट ब्लड सेल्स संक्रमण से लड़ने के लिए Reactive Nitrogen Species बनाती हैं, लेकिन कैंडिडा ऑरिस इस प्रक्रिया को बाधित कर देता है। इसके कारण मरीजों में त्वचा संक्रमण, ब्लडस्ट्रीम इन्फेक्शन (Sepsis), आंतरिक अंगों में संक्रमण और कई गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि कमजोर इम्यूनिटी वाले मरीज, कैंसर, डायबिटीज, किडनी रोग, अंग प्रत्यारोपण करा चुके लोग, लंबे समय तक ICU में भर्ती मरीज और बुजुर्ग इस संक्रमण के सबसे अधिक जोखिम में हैं। CDC के मुताबिक, कैंडिडा ऑरिस से संक्रमित गंभीर मरीजों में मृत्यु दर 30 से 60 प्रतिशत तक हो सकती है।
हालांकि एजेंसी का यह भी कहना है कि अधिकांश संक्रमित मरीज पहले से गंभीर बीमारियों से पीड़ित होते हैं, इसलिए मौत का सटीक कारण तय करना हमेशा आसान नहीं होता। मेडिकल विशेषज्ञों ने अस्पतालों में सख्त संक्रमण नियंत्रण, नियमित स्क्रीनिंग, मरीजों की समय पर पहचान, हाथों की स्वच्छता और मेडिकल उपकरणों की प्रभावी सफाई पर विशेष जोर दिया है। उनका मानना है कि फिलहाल यही इस खतरनाक सुपर फंगस के प्रसार को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है।

