उज्जैन। श्रावण माह के दूसरे सोमवार को उज्जैन में बाबा महाकाल की भव्य सवारी निकली। भगवान महाकाल चांदी की पालकी में चंद्रमौलेश्वर और हाथी पर मनमहेश स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले। सवारी मार्ग पर हजारों श्रद्धालु बाबा के दर्शन के लिए उमड़े। पूरे शहर में ‘जय श्री महाकाल’ के जयकारे गूंजते रहे।
सवारी से पहले श्री महाकालेश्वर मंदिर के सभामंडप में भगवान महाकाल का षोडशोपचार पूजन-अर्चन और आरती की गई। शासकीय पुजारी पं. घनश्याम शर्मा ने पूजन-अर्चन संपन्न कराया। इसके बाद भगवान चंद्रमौलेश्वर पालकी में और मनमहेश स्वरूप हाथी पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देने के लिए नगर भ्रमण पर निकले।
पालकी को गार्ड ऑफ ऑनर, मनमहेश पर हुई पुष्पवर्षा
श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही सशस्त्र पुलिस बल के जवानों ने पालकी में विराजित भगवान चंद्रमौलेश्वर को गार्ड ऑफ ऑनर दिया। वहीं हाथी पर सवार भगवान मनमहेश के स्वरूप पर पुष्पवर्षा की गई।
सवारी के दोनों ओर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। भक्तों ने पुष्पवर्षा कर बाबा महाकाल के दर्शन किए और हर-हर महादेव तथा जय श्री महाकाल के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो गया।
रामघाट पर क्षिप्रा जल से हुआ पूजन
गार्ड ऑफ ऑनर के बाद सवारी महाकाल मंदिर से गुदरी चौराहा, बक्षी बाजार और कहारवाड़ी होते हुए रामघाट पहुंची। यहां चंद्रमौलेश्वर स्वरूप में भगवान महाकाल ने मां क्षिप्रा के तट पर भक्तों को दर्शन दिए। इसके बाद क्षिप्रा के जल से भगवान का पूजन किया गया।
पूजन के बाद सवारी रामानुजकोट, मोढ़ की धर्मशाला, कार्तिक चौक, खाती समाज मंदिर, सत्यनारायण मंदिर, ढाबा रोड, टंकी चौराहा, छत्री चौक, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार और गुदरी बाजार होते हुए वापस श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंची।
जनजातीय नृत्य ने बढ़ाई सवारी की भव्यता
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशानुरूप इस बार बाबा महाकाल की सवारी में जनजातीय संस्कृति को भी प्रमुखता दी गई। दूसरे सोमवार की सवारी में मध्य प्रदेश के अलग-अलग जिलों से आए जनजातीय नृत्य दलों ने रंगारंग प्रस्तुतियां दीं।
जनजातीय कलाकारों की प्रस्तुतियां श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहीं। सवारी के आगे घुड़सवार, पुलिस बल और विभिन्न भजन मंडलियां चल रही थीं।
LED स्क्रीन वाले चलित रथ से श्रद्धालुओं ने किए दर्शन
बाबा महाकाल की सवारी के सुगम दर्शन के लिए श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति ने चलित रथ की व्यवस्था की। रथ के दोनों ओर लगी LED स्क्रीन के माध्यम से सवारी का लाइव प्रसारण किया गया, जिससे दूर खड़े श्रद्धालुओं को भी भगवान के दर्शन हो सके।
सवारी मार्ग पर श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल पर पुष्पवर्षा की। महिलाओं की भजन मंडलियों ने शिव स्तुतियां प्रस्तुत कीं। डमरू और मंजीरों की गूंज के बीच विशाल ध्वज के साथ बाबा महाकाल की पालकी आगे बढ़ती रही और पूरा उज्जैन भक्तिभाव में डूबा नजर आया।

