नई दिल्ली: टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी टाटा संस में नेतृत्व को लेकर अनिश्चितता बढ़ती नजर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, टाटा संस के चेयरमैन एन. चंद्रशेखरन अपने पद से इस्तीफा देने की संभावना पर करीबी लोगों के साथ चर्चा कर चुके हैं।
चंद्रशेखरन का मौजूदा कार्यकाल फरवरी 2027 तक है, लेकिन उनका पद पर बने रहना 18 अगस्त को होने वाली टाटा संस की वार्षिक आम बैठक यानी AGM के नतीजों पर निर्भर कर सकता है। AGM में उनके दोबारा डायरेक्टर चुने जाने को लेकर स्थिति अहम मानी जा रही है।
AGM से पहले बढ़ी अनिश्चितता
चंद्रशेखरन AGM के नतीजे का इंतजार करने के बजाय पहले ही पद छोड़ने के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। अगर AGM में उनका पक्ष मजबूत नहीं रहता है, तो उनकी चेयरमैनशिप पर संकट खड़ा हो सकता है। इससे टाटा ग्रुप में नेतृत्व को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
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टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका अहम
AGM में टाटा ट्रस्ट्स की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और अन्य ट्रस्टियों के रुख को लेकर अभी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
वहीं, सर रतन टाटा ट्रस्ट (SRTT) से जुड़े मामले भी इस पूरे घटनाक्रम को प्रभावित कर सकते हैं। महाराष्ट्र चैरिटी कमिश्नर ने फिलहाल SRTT को कुछ फैसले लेने से रोक रखा है। SRTT के कुछ ट्रस्टियों, जिनमें नोएल टाटा, डेरियस खंबाटा और जहांगीर जहांगीर शामिल हैं, ने AGM में हिस्सा लेने की अनुमति मांगी है। ट्रस्टियों का कहना है कि ट्रस्ट के हितों की रक्षा के लिए AGM में उनकी मौजूदगी जरूरी है।
टाटा ग्रुप के कारोबार पर असर की चिंता
टाटा ग्रुप से जुड़े कुछ अधिकारियों और अंदरूनी लोगों ने समूह में बढ़ती अनिश्चितता पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि निर्णय लेने की प्रक्रिया में गतिरोध का असर कारोबार पर पड़ सकता है। ग्रुप से जुड़े एक अधिकारी के मुताबिक, वोटिंग के अधिकार को किसी तरह के दबाव या हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।
AGM और डायरेक्टर पद को लेकर कानूनी पेंच
कंपनी एक्ट के तहत रोटेशन के आधार पर रिटायर होने वाले डायरेक्टर AGM की तारीख तक अपने पद पर बने रहते हैं। हालांकि, अगर पर्याप्त कोरम नहीं होने के कारण AGM आयोजित नहीं हो पाती है, तो ऐसी स्थिति के परिणामों को लेकर कानूनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट नहीं है। ऐसे में टाटा संस के आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन और स्थगित AGM से जुड़े प्रावधान महत्वपूर्ण हो सकते हैं।
फिलहाल 18 अगस्त की AGM पर सभी की नजरें टिकी हैं। इसके नतीजे से यह साफ हो सकता है कि एन.चंद्रशेखरन टाटा संस के चेयरमैन के पद पर बने रहेंगे या कंपनी में नेतृत्व परिवर्तन की प्रक्रिया शुरू होगी।

