पश्चिम बंगाल में SIR: ‘प्रोजनी मैपिंग’ पर ECI का फोकस, सामने आईं 3.84 करोड़ एंट्री में बड़ी विसंगतियाँ

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पश्चिम बंगाल। भारतीय निर्वाचन आयोग इस समय पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision- SIR) प्रक्रिया के तहत ‘प्रोजनी मैपिंग’ (वंश/संतान मैपिंग) पर विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। ECI सूत्रों के अनुसार, यह पूरी कवायद का सबसे महत्वपूर्ण और चुनौतीपूर्ण पहलू है। राज्य में कुल 7.66 करोड़ मतदाताओं में से 50% से अधिक मतदाताओं ने ‘प्रोजनी मैपिंग’ वाले फॉर्म जमा किए हैं, और इन्हीं में बड़े पैमाने पर विसंगतियाँ सामने आई हैं। ECI 16 दिसंबर को ड्राफ्ट मतदाता सूची (draft electoral roll) प्रकाशित करने की तैयारी में है।

क्या है ECI का ‘मैपिंग’ प्रोसेस?

ECI ‘मैपिंग’ शब्द का उपयोग 2025 की मतदाता सूची में एक मतदाता के नाम को 2002 में पिछले SIR के बाद तैयार की गई मतदाता सूची से जोड़ने के लिए करता है। इस प्रक्रिया की तीन मुख्य श्रेणियाँ हैं:

पहली Self Mapping:  ऐसे मतदाता जिनके नाम 2025 की सूची के साथ-साथ 2002 की सूची में भी मौजूद हैं। ऐसे मतदाताओं को आगे किसी दस्तावेजी प्रमाण की आवश्यकता नहीं होगी।

दूसरी Progeny Mapping:  ऐसे मतदाता जिनके नाम 2002 की सूची में नहीं हैं, लेकिन उनके ब्लड रिलेशन (जैसे पिता, माता, दादा-दादी, आदि) उस सूची में मौजूद हैं। इन्हें भी आमतौर पर आगे सत्यापन की आवश्यकता नहीं होती।

तीसरी No Mapping/Un-mapped:   ऐसे मतदाता जो न तो 2002 की मतदाता सूची में हैं और न ही उनके कोई रिश्तेदार उस सूची में हैं। इन्हें अनिवार्य रूप से सुनवाई के लिए बुलाया जाएगा, जहाँ उन्हें वैध मतदाता होने का प्रमाण देने के लिए दस्तावेज़ प्रस्तुत करने होंगे।

आँकड़ों में विसंगति

ECI के अनुसार, पश्चिम बंगाल के 7.66 करोड़ मतदाताओं में से 2.93 करोड़ मतदाताओं ने ‘स्व-मैपिंग’ वाले फॉर्म जमा किए है। तो वही 3.84 करोड़ मतदाताओं ने ‘प्रोजनी मैपिंग’ का विकल्प चुना। जिसमें से 30 लाख मतदाताओं ने ‘कोई मैपिंग नहीं’ का विकल्प चुना।

करीब 58 लाख मतदाताओं के प्रपत्र ECI को प्राप्त नहीं हुए हैं, जिनमें 24,18,699 मृत मतदाता, 12,01,462 लापता मतदाता, 19,93,087 स्थायी रूप से स्थानांतरित हो चुके मतदाता और 1,37,475 ऐसे मतदाता शामिल हैं जिनका नामांकन कई जगहों पर है।

बड़ी अनियमितताएँ सामने आईं

इस पूरी कार्यवाई में सबसे बड़ी अनियमितताएँ ‘प्रोजनी मैपिंग’ श्रेणी में सामने आई हैं। जिसमें 2025 के कई मतदाताओं ने खुद को 2002 के मतदाताओं से अपने माता-पिता के रूप में जोड़ा है, लेकिन इन लिंक्स में दिए गए माता-पिता के नाम उनके मौजूदा 2025 के रिकॉर्ड में दर्ज माता-पिता के नामों से मेल नहीं खाते हैं।

गलत ‘प्रोजनी मैपिंग’ (Progeny Mapping) की पहचान करने के लिए, ECI द्वारा नियुक्त चुनावी रोल पर्यवेक्षकों ने अब घर-घर सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) उन मतदाताओं की एक सूची तैयार करेंगे जिन पर झूठी जानकारी देने का संदेह है। सुनवाई और दस्तावेजों के सत्यापन के बाद ही ECI यह तय करेगा कि इन नामों को अंतिम मतदाता सूची में शामिल किया जाए या नहीं।