इलाज की उड़ान बनी आख़िरी सफर: 8 लाख का कर्ज, एयर एंबुलेंस क्रैश में उजड़ गए कई घर

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चतरा। झारखंड में एक ऐसी घटना हुई है, जिसने सबको अंदर तक झंगझोर दिया है। रांची से नई दिल्ली के लिए उड़ान भरने वाली एक एयर एंबुलेंस सिमरिया के घने जंगलों में दुर्घटनाग्रस्त हो गई। इस दर्दनाक हादसे में सवार सभी 7 लोगों की मौत हो गई। विमान ‘रेड बर्ड एविएशन’ का बताया जा रहा है, जो खराब मौसम की वजह से क्रैश हो गया। इस हादसे ने सिर्फ एक परिवार नहीं, बल्कि कई घरों की खुशियां छीन लीं।

बेहतर इलाज की उम्मीद में दिल्ली जा रहे थे

जानकारी अनुसार, लातेहार जिले के चंदवा निवासी 65% तक झुलसे संजय साव को गंभीर हालत में दिल्ली के गंगाराम अस्पताल ले जाया जा रहा था। कुछ दिन पहले उनके होटल में शॉर्ट सर्किट से आग लग गई थी, जिसमें वह बुरी तरह झुलस गए थे। रांची के एक निजी अस्पताल में इलाज के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें दिल्ली रेफर कर दिया था। सड़क मार्ग से ले जाना संभव नहीं था, इसलिए परिवार ने एयर एंबुलेंस बुक करने का फैसला किया। एक ऐसा फैसला, जो उनकी आर्थिक स्थिति से कहीं बड़ा था।

8 लाख का कर्ज, 6 लाख किराए में खर्च

संजय के पिता ने बताया कि- एयर एंबुलेंस का खर्च उठाने के लिए उन्होंने रिश्तेदारों और बाजार से करीब 8 लाख रुपये उधार लिए। इसमें से लगभग 6 लाख रुपये सिर्फ एंबुलेंस बुकिंग में खर्च हो गए। परिवार पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर था, लेकिन बेटे की जान बचाने की उम्मीद में उन्होंने सब कुछ दांव पर लगा दिया। साथ ही परिवार के बड़े भाई विजय साव ने कहा- हम भाई को एयर एंबुलेंस से भेजकर घर लौटे ही थे कि टीवी पर हादसे की खबर चलने लगी। एक पल में सब खत्म हो गया।

हादसे में कौन-कौन थे सवार?

इस एयर एंबुलेंस में कुल 7 लोग सवार थे, जिनमें शामिल थे-

  • मरीज संजय साव
  • उनकी पत्नी अर्चना
  • रिश्तेदार ध्रुव
  • अस्पताल का मेडिकल स्टाफ
  • दो पायलट और क्रू मेंबर

सभी की मौके पर ही मौत हो गई। प्रशासन ने मलबे से शवों को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और हादसे की जांच शुरू कर दी गई है।

अगर रांची में बेहतर इलाज होता…

वहीं परिजनों का दर्द सिर्फ हादसे तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि अगर रांची में ही विश्वस्तरीय बर्न ट्रीटमेंट की सुविधा उपलब्ध होती, तो दिल्ली जाने की जरूरत ही नहीं पड़ती। इस दुर्घटना के बाद सवाल उठ रहे हैं कि गंभीर मरीजों को राज्य के बाहर रेफर क्यों करना पड़ता है? संजय साव अपने पीछे पत्नी और दो छोटे बच्चों को छोड़ गए हैं। अब परिवार पर कर्ज का बोझ और भविष्य की अनिश्चितता दोनों साथ खड़े हैं।

कई घरों की खुशियां उजड़ीं

यह हादसा सिर्फ एक विमान दुर्घटना नहीं, बल्कि उन परिवारों की त्रासदी है जिन्होंने अपनों को खो दिया। एक तरफ इलाज के लिए लिया गया कर्ज, दूसरी तरफ अचानक आई मौत। इसने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। जांच एजेंसियां हादसे के कारणों की पड़ताल कर रही हैं, लेकिन जिन घरों में चूल्हा ठंडा पड़ गया है, उनके लिए यह नुकसान कभी पूरा नहीं हो पाएगा।

 

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