Tuesday, June 2, 2026
Contact: +91 97559 93555
Email: tathyawani@gmail.com
spot_img
Homeमध्य प्रदेशशहरों के पेड़ों की जिम्मेदारी अब वन विभाग पर

शहरों के पेड़ों की जिम्मेदारी अब वन विभाग पर

मप्र के हरों में तेजी से बढ़ते निर्माण और विकास कार्यों के बीच पेड़ों की कटाई लंबे समय से चिंता का विषय रही है। ऐसे में राज्य सरकार द्वारा यह निर्णय लेना कि अब नगरीय क्षेत्रों में पेड़ों की कटाई या छंटाई की अनुमति केवल वन विभाग देगा, एक महत्वपूर्ण और समयोचित कदम माना जा सकता है। प्रदेश के 413 नगरीय निकायों में फॉरेस्ट रेंजर को ‘ट्री ऑफिसर’ के रूप में नियुक्त करना न केवल प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक स्पष्ट संकेत भी है।
दरअसल, शहरों में कई बार विकास परियोजनाओं के नाम पर बड़ी संख्या में हरे-भरे पेड़ काटे जाते रहे हैं। पहले इस प्रक्रिया में जिला प्रशासन और नगर निकायों के पास अनुमति देने का अधिकार था, लेकिन कई मामलों में इस अधिकार के दुरुपयोग के आरोप भी लगे। इसी पृष्ठभूमि में मध्यप्रदेश हाई कोर्ट की इंदौर खंडपीठ के निर्देशों के बाद सरकार ने व्यवस्था में बदलाव किया है। अदालत ने साफ कहा था कि ट्री ऑफिसर की नियुक्ति का अधिकार केवल राज्य सरकार के पास है और इस जिम्मेदारी को वन सेवा के अधिकारियों को ही दिया जाना चाहिए। नई व्यवस्था के तहत अब यदि किसी व्यक्ति या संस्था को पेड़ काटने या छंटाई की जरूरत होगी, तो उसे संबंधित क्षेत्र के फॉरेस्ट रेंजर से अनुमति लेनी होगी। यदि अनुमति नहीं मिलती है, तो उप वनमंडल अधिकारी के पास अपील का विकल्प भी रहेगा। इससे निर्णय प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और जवाबदेह बनने की उम्मीद है। यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शहरों में हरित क्षेत्र तेजी से घट रहा है। बढ़ती आबादी, सड़क विस्तार, भवन निर्माण और अन्य परियोजनाओं के कारण पेड़ों पर दबाव लगातार बढ़ा है। ऐसे में वन विभाग की सीधी निगरानी से उम्मीद की जा रही है कि बिना ठोस कारण के पेड़ों की कटाई पर रोक लगेगी और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने की दिशा में गंभीरता दिखेगी। हालांकि, इस नई व्यवस्था के सामने कुछ चुनौतियां भी होंगी। प्रदेश के सभी नगरीय क्षेत्रों में वन विभाग के अधिकारियों पर काम का बोझ बढ़ेगा। साथ ही यह भी जरूरी होगा कि अनुमति देने की प्रक्रिया पारदर्शी और समयबद्ध हो, ताकि नागरिकों और विकास कार्यों को अनावश्यक परेशानी न हो। कुल मिलाकर, सरकार का यह निर्णय पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास के बीच संतुलन बनाने की कोशिश है। यदि इसे ईमानदारी और सख्ती से लागू किया गया, तो शहरों में हरियाली बचाने की दिशा में यह एक प्रभावी कदम साबित हो सकता है। किसी भी शहर की असली पहचान केवल ऊंची इमारतों से नहीं, उसके पेड़ों और हरित वातावरण से होती है। शहरों में पेड़ों को बचाने की यह पहल मप्र के पर्यावरण और जीवन को सुरक्षित करने की दिशा में क्रांतिकारी कदम साबित होगी।

-मिलिंद ठाकरे

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

ई-पेपर

Bhopal- 24 to 30 May 2026
Bhopal- 17 to 23 May 2026

शासकीय निविदाएं

विज्ञापन