नई दिल्ली: थोक महंगाई के मोर्चे पर जुलाई में मामूली राहत मिली है। वाणिज्य मंत्रालय के शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक, जुलाई 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई दर घटकर 9.78% हो गई, जबकि जून में यह 9.87% थी। हालांकि, महंगाई में यह कमी मुख्य रूप से ईंधन और बिजली की कीमतों में गिरावट की वजह से आई है। खाने-पीने की चीजों समेत कई दूसरी श्रेणियों में महंगाई बढ़ी है।
ईंधन-बिजली ने दी बड़ी राहत
जुलाई में ईंधन और बिजली की महंगाई दर घटकर 20.05% रह गई, जो जून में 27.41% और मई में 30.33% थी। ईंधन की कीमतों में गिरावट से माल ढुलाई और उत्पादन लागत पर दबाव कम होने की उम्मीद है।
जून की 9.87% थोक महंगाई दर नई WPI सीरीज के तहत अब तक का सबसे ऊंचा स्तर थी। जुलाई का आंकड़ा बाजार के अनुमान से भी थोड़ा बेहतर रहा।
खाने-पीने की चीजें हुईं महंगी
ईंधन के मोर्चे पर राहत के बावजूद खाद्य वस्तुओं की महंगाई बढ़ गई। जुलाई में WPI फूड इंडेक्स की महंगाई दर 6.65% रही, जबकि जून में यह 6.14% और मई में 4.49% थी।
इससे संकेत मिलता है कि थोक बाजार में खाद्य वस्तुओं की कीमतों का दबाव लगातार बढ़ रहा है। इसका असर आने वाले समय में खुदरा बाजार और घरेलू बजट पर भी पड़ सकता है।
प्राइमरी आर्टिकल्स और मैन्युफैक्चरिंग में भी तेजी
जुलाई में प्राइमरी आर्टिकल्स की महंगाई दर बढ़कर 8.52% हो गई, जो जून में 7% थी। इसी तरह मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई भी जून के 7.48% से बढ़कर जुलाई में 8.29% पहुंच गई।
इन आंकड़ों से पता चलता है कि कच्चे माल और तैयार सामान की कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इसका असर आगे चलकर उपभोक्ता वस्तुओं की कीमतों पर पड़ सकता है।
खुदरा महंगाई भी बढ़ी
खुदरा महंगाई के आंकड़ों में भी जुलाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई। CPI आधारित महंगाई दर जून के 4.38% से बढ़कर जुलाई में 4.45% हो गई। ऐसे में थोक महंगाई में मामूली गिरावट के बावजूद आम लोगों को रोजमर्रा की चीजों की कीमतों में तत्काल बड़ी राहत मिलने की उम्मीद कम है।
असली राहत अभी दूर
थोक महंगाई में कमी का सबसे बड़ा कारण ईंधन और बिजली की कीमतों में आई गिरावट है। दूसरी ओर, खाद्य पदार्थों, प्राथमिक वस्तुओं और मैन्युफैक्चर्ड प्रोडक्ट्स की महंगाई बढ़ रही है। इसलिए आने वाले महीनों में आम लोगों की जेब पर महंगाई का दबाव कितना कम होगा, यह मुख्य रूप से खाद्य कीमतों के रुख पर निर्भर करेगा।

