एमपीटी में 80 लाख 81 हजार रुपए का बिल और कोटेशन तैयार करने के मामले में 2 विभागीय अधिकारी निलंबित

भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य पर्यटन विकास निगम (एमपीटी) लिमिटेड भोपाल के विंडस एण्ड वेव्स और बोट क्लब के दो प्रबंधकों ने 80.82 लाख रुपये की धोखाधड़ी के बाद निलंबित कर दिया गया है, लेकिन सामान सप्लाई करने वाली कंपनी पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। निगम के एमडी डॉ. टी. ईलैया राजा द्वारा के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भी एफआईआर की प्रक्रिया एक महीने से लंबित है। सूत्रों का कहना है कि कुछ अधिकारी जानबूझकर कार्रवाई रोक रहे हैं, क्योंकि कंपनी पर कार्रवाई होती है तो कई और अधिकारी जांच के दायरे में आ सकते हैं।

कंपनी कई सालों से निगम में कर रही थी सप्लाई

सूत्रों के मुताबिक कंपनी पिछले कई वर्षों से एमपीटी के अलग-अलग विभागों में सामान सप्लाई कर रही थी। हैरान करने वाली बात तो यह है कि कंपनी मालिक ने तीन अलग-अलग कंपनियों के नाम से रजिस्ट्रेशन करा रखा था और कोटेशन प्रक्रिया में मनचाहा काम हासिल करने के लिए लगातार इन्हीं कंपनियों का इस्तेमाल करता रहा। सबसे चौकाने वाली बात यह है कि जिन पतों पर ये कंपनियाँ दर्ज हैं, वहाँ न कोई दुकान है और न ही गोदाम। ऐसे में सप्लाई की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

जांच रिपोर्ट खुलासा 

जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि कोटेशन प्रक्रिया के नाम पर बिलों को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर खरीदारी की गई। भौतिक सत्यापन के दौरान 72 में से 40 वस्तुएँ उपलब्ध नहीं मिलीं, जिसके कारण निगम को 22.37 लाख रुपये की सीधी वित्तीय हानि उठानी पड़ी। साथ ही, खरीदी गई सामग्री पर कंपनी का लोगो, बारकोड या MRP नहीं पाया गया, जिससे उनकी गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए।

किस- किस के नाम आए सामने

गौरतलब है कि राज्य पर्यटन विकास निगम के क्षेत्रीय प्रबंधक हरनाथ सिंह दंडोतिया की शिकायत पर पर्यटन विकास निगम के कर्मचारी अरविंद शर्मा, अनिल कुरुप समेत एक ही परिवार के 3 फर्म संचालकों को घोटाले का आरोपी बनाया है। बता दें अरविन्द शर्मा और अनिल कुरूप ने मेसर्स गणेश ट्रेडर्स, आदित्य एंटरप्राइेस की प्रोपराइटर देबजानी मुखर्जी, मेसर्स सिद्धि विनायक ट्रेडर्स के प्रोपराइटर आदित्य मुखर्जी, संजय मुखर्जी के साथ साजिश रचकर फर्जी बिल लगाए।