बालाघाट। लामता, परसवाड़ा और चागुटोला क्षेत्र में अंग्रेजी और देशी शराब की अवैध बिक्री खुलेआम जारी है। ढाबों से लेकर किराना दुकानों तक शराब आसानी से उपलब्ध है और हैरानी की बात यह है कि यह खेल लंबे समय से चलता आ रहा है, जबकि प्रशासन और आबकारी विभाग पूरी तरह चुप्पी साधे बैठे हैं।
महिलाएँ लगातार दे रहीं ज्ञापन
लामता क्षेत्र की महिलाओं ने कई बार तहसील और थाना लामता में ज्ञापन देकर प्रशासन को जगाने का प्रयास किया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। अवैध शराब बिक्री के विरोध में महिलाओं ने सड़क पर उतरकर प्रदर्शन भी किया था, साथ ही एसडीएम और कलेक्टर बालाघाट से मुलाक़ात कर गुहार लगाई थी। उनका कहना है कि किराना दुकानों और होटलों में धड़ल्ले से शराब बेची जा रही है और शाम होते-होते शराब खरीदने वालों की लाइन लग जाती है, जिसे रोकने वाला कोई नहीं है। महिलाओं का आरोप है कि अवैध शराब ने गांव का माहौल बिगाड़ दिया है, घरों में झगड़े बढ़े हैं और युवा-बच्चे तक नशे के शिकार होते जा रहे हैं।
ओवर रेट में धंधा
लामता में न केवल अवैध शराब बिक रही है, बल्कि लाइसेंसी दुकानों में भी प्रिंट रेट से 20 से 30 रुपये अधिक कीमत वसूली जा रही है। शराब दुकानों पर रेट लिस्ट तक नहीं लगाई गई है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि शराब दुकान मालिक आबकारी विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर ओवर रेट वसूली कर रहे हैं। इससे आए दिन दुकानों पर सेल्समैन और ग्राहकों के बीच झगड़े हो रहे हैं।
लामता न्यू अस्पताल के पास रहने वाले लेखराम ने बताया कि उन्होंने 4 दिसंबर को अंग्रेजी शराब दुकान से बिग पाइपर का क्वार्टर 190 रुपये में खरीदा, जबकि इसकी वास्तविक कीमत 147–170 रुपये के बीच है। विरोध करने पर सेल्समैन ने उनके साथ झगड़ा भी किया। इस मामले की शिकायत कलेक्टर जन सुनवाई में की गई, लेकिन अब तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई।
प्रशासन और आबकारी विभाग पर गंभीर सवाल
स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि अंग्रेजी और देशी शराब दुकानों पर ओवर रेट वसूली और अवैध शराब बिक्री दोनों ही आबकारी विभाग और पुलिस अधिकारियों की जानकारी में चल रहे हैं, लेकिन कार्रवाई न होने से यह संपूर्ण नेटवर्क खुलेआम फल-फूल रहा है। गांव-गांव में शराब की उपलब्धता बढ़ने से सामाजिक वातावरण बिगड़ रहा है और नशाखोरी लगातार बढ़ती जा रही है।


