जिला प्रशासन लगातार कर रहा एनजीटी के आदेशों की अवमानना, निर्धारित समय में नहीं की उचित कार्रवाई

शेयर करे

देवी तालाब मामले में निष्क्रिय हुआ जिला प्रशासन, नहीं हटा अतिक्रमण

बालाघाट। नगरपालिका क्षेत्र के कचरा डंपिंग मामले में जहां प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा नगरपालिका परिषद बालाघाट को 17 करोड़ रुपए से अधिक का जुर्माना वसूलने का नोटिस जारी किया गया। जुर्माना वसूली को लेकर जिला प्रशासन सख्ती दिखा रहा है, वहीं दूसरी ओर बालाघाट नगर में स्थिति शासकीय देवी तालाब का अस्तित्व प्रदूषण और अतिक्रमण के कारण खतरे में है और जिला प्रशासन इस पर नजरें बंद कर बैठा हुआ है। हालांकि इस संबध्ां में भी एनजीटी भोपाल द्वारा 23 अक्टूबर 2025 को आदेश जारी किए गए थे। यह मामला बीते 10 वर्षों से लंबित चल रहा है। किन्तु इस दिशा में कोई भी ठोस कदम जिला प्रशासन और नगरीय निकाय द्वारा नहीं उठाया जाना कई सवालों को जन्म दे रहा है।
एनजीटी भोपाल के आदेशों की अवमानना
एनजीटी भोपाल ने याचिकाकर्ता द्वाराका नाथ चौधरी व अन्य की याचिका पर मध्यप्रदेश सरकार और अन्य के खिलाफ 23 अक्टूबर 2025 को कलेक्टर बालाघाट को निर्देश जारी किए थे। आदेश में उल्लेख है कि उक्त तालाब में नगर का गंदा पानी मिलता है जिसके कारण देवी तालाब का पानी प्रदूषित हो रहा है और उस्का अस्तित्व खतरे में है। इस पर शीघ्रता से जिला प्रशासन उचित कार्रवाही करे और चार सप्ताह के अंदर एनजीटी को जबाव दे। उल्लेखनीय है कि उक्त आदेश का कलेक्टर बालाघाट के द्वारा आज तक पालन नहीं किया गया है।एनजीटी ने आदेश का पालन नहीं किये जाने पर कलेक्टर बालाघाट से जवाब मांगा है। इस संदर्भ में भोपाल के द्वारा पुनः दिनांक 10 नबंवर 2025 को आदेश जारी कर कलेक्टर बालाघाट/मुख्य नगरपालिका अधिकारी नगरपालिका परिषद बालाघाट को निर्देशित किया है कि एक माह के भीतर शासकीय देवी तालाब में अशोधित पानी को जाने से रोका जाए और नियमानुसार अतिक्रमण को हटाएं। किन्तु एनजीटी भोपाल द्वारा जारी आदेश की समयसीमा बीत जाने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
नगरपालिका ने प्रारंभ की कार्यवाही
नगरपालिका परिषद बालाघाट के जिम्मेदारों का कहना है कि उनके द्वारा एनजीटी भोपाल के दिनांक 10/11/2025 के परिपालन में शासकीय देवी तालाब में गणेश मंदिर के पास फेंसिंग लगाने का कार्य किया गया है जहाँ से कई लोगों के द्वारा देवी तालाब की भूमि पर कचरा डालकर तालाब को प्रदूषित किया जा रहा था वही देवी तालाब की साफ़-सफाई भी प्रारंभ कर दी गई है और देवी तालाब की बड़े स्तर आंतरिक साफ-सफाई के लिए 10 लाख रूपए का टेंडर जारी कर दिया है जो प्रक्रियाधीन है और जैसे ही टेंडर प्रक्रिया पूर्ण होगी वैसे भी बड़े स्तर पर देवी तालाब में साफ़-सफाई का कार्य प्रारंभ कर दिया जावेगा स साथ ही देवी तालाब में प्रदूषित पानी को रोकने के लिए बड़ी नाली निर्माण का भी डीपीआर जारी कर स्वीकृत करा लिया गया और दर स्वीकृति के शासन के पास भेजा गया है जैसे भी दर स्वीकृत होगी वैसे भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित कर बड़ी नाली का निर्माण कर प्रदूषित पानी की देवी तालाब में जाने से रोकने की व्यवस्था कर दी जावेगी।
अतिक्रमण पर मौन जिला प्रशासन
एनजीटी भोपाल के आदेश पर शासकीय देवी तालाब से अतिक्रमण को हटाने को लेकर जिला प्रशासन मौन है वही जमीनी स्तर उनके द्वारा कोई कार्यवाही अतिक्रमण हटाने की नजर भी नहीं आ रही है वही नगरपालिका परिषद बालाघाट का ऐसा मानना शासकीय देवी तालाब से अतिक्रमण हटाने का अधिकार उनके पास नहीं है क्योंकि देवी तालाब में मालिकाना हक से सम्बंधित विवाद कई वर्षो से चला आ रहा है जो राजस्व विभाग से सम्बंधित है इसलिए देवी तालाब का अतिक्रमण हटाने का क्षेत्राधिकार राजस्व विभाग के पास है जो कलेक्टर बालाघाट के अधीन है स
क्या है देवी तालाब का विवाद
शासकीय देवी तालाब के मालिकाना हक के सम्बन्ध में द्वितीय व्यवहार न्यायाधीश वर्ग-2 द्वारा व्यवहार वाद क्रमांक 28-ए/1971 न्यायालय जिला न्यायाधीश बालाघाट का व्यवहार अपील क्रमांक 4-अ/1972 एवं उच्च न्यायालय जबलपुर के द्वितीय व्यवहार अपील क्रमांक 119/1974 एवं 120/1974 ने उमराव बी के पक्ष में पटवारी हल्का क्रमांक 13/2 खसरा नंबर 319 की 16.14 एकड़ भूमि में से 1 एवं 2 (कुल 3 डिसमिल) डिसमिल भूमि का मालिकाना हक निर्धारित कर चूका है एवं शेष भूमि अर्थात 16.11 एकड़ भूमि को मध्यप्रदेश शासन के पक्ष में घोषित किया है स किन्तु तत्कालीन राजस्व अधिकारियों की न्यायालय के आदेश की त्रुटिपूर्ण विवेचना के कारण सम्पूर्ण भूमि अर्थात 16.14 एकड़ भूमि उमराव बी के नाम पर दज कर दी गई।
हो सकती है अवमानना की कार्यवाही
एनजीटी भोपाल द्वारा शासकीय देवी तालाब में प्रदूषित पानी जाने को रोकने एवं नियमानुसार अतिक्रमण हटाने के लिए दिनांक 23/09/2025 एवं दिनांक 10/11/2025 को जारी आदेशों का पालन करने के लिए दी गई समयसीमा पहले ही समाप्त हो चुकी है और कलेक्टर बालाघाट एवं मुख्य नगरपालिका अधिकारी, नगरपालिका परिषद बालाघाट के द्वारा एनजीटी भोपाल के आदेश के पालन में कोई कार्यवाही नहीं की गई है जिससे ऐसा माना जा रहा है कि दिनांक 12/01/2025 को एनजीटी भोपाल में नियत पेशी के दिन इन पर एनजीटी भोपाल उनके आदेशों की अवमानना के लिए एन पर कोई कार्यवाही कर सकता है।