भ्रष्टाचार की मलाई किस – किस ने खाई ? ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने कर दिए नियम विरुध्द टेंडर !

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आदिम जाति कल्याण विभाग के भ्रष्टाचारियों पर क्या होगी कार्यवाही ?

बालाघाट। प्रदेश और केंद्र सरकार जहां समाज के अंतिम छोर पर मौजूद लोगों के विकास के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चला रही हैं, वहीं सरकारी तंत्र में मौजूद लोग किस तरह से सरकार की मंशा को पलीता लगाने में लगे हुए हैं। ऐसा ही एक मामला बालाघाट जिले के आदिम जाति कल्याण विभाग में हो रहे भ्रष्टाचार में उजागर हुआ है।

दरअसल मामला बालाघाट जिले में जनजातीय छात्रावासों के लिए रोटी मेकिंग मशीन खरीदी (लगभग 1 करोड़ 85 लाख रुपये) का मामला सामने आया है जिसमें गंभीर अनियमितताओं के आरोप लग रहें है। सूत्र बताते है कि बाबा ट्रेडर्स, प्लर्न एंटरप्राइजेज एवं जे के एस इंजीनियरिंग वर्क्स को बिना अनुभव और बिना 5 लाख 50 हजार रुपये की धरोहर राशि जमा किए योग्य घोषित किया गया, जबकि 17 से 20 अन्य फर्मों को इसी आधार पर अयोग्य ठहराया गया।

सूत्र यह भी बताते है कि जीईएम एवं भंडार क्रय नियमों के अनुसार केवल रोटी मेकिंग मशीन के वास्तविक निर्माता को ही धरोहर राशि में छूट का प्रावधान है, जबकि योग्य ठहराई गई फर्में निर्माता नहीं थीं। सूत्रों के अनुसार यह भी आशंका जताई जा रही है कि निविदा में फर्जी दस्तावेज लगाए गए।

निविदा क्रमांक GEM/2025/B/6404306 दिनांक 27/08/2025 की शर्तों में स्पष्ट उल्लेख है कि 5 लाख 50 हजार रुपये की डीडी सहायक आयुक्त, जनजातीय कार्यालय विभाग, बालाघाट के नाम से जमा करना अनिवार्य है। इसके बावजूद बिना डीडी के फर्मों को योग्य घोषित किया जाना जांच का विषय बताया जा रहा है।

इन मामलों को लेकर अब विभागीय अधिकारियों पर पूर्व में भी इसी प्रकार की टेंडर में की गई अनियमितताओं के आरोप लगते रहे हैं। अब यह मामला उजागर होने के बाद देखना होगा कि ठेकेदारों को लाभ पहुंचाने के लिए टेंडर यथावत रखा जाएगा या निरस्त कर संबंधित अधिकारियों पर कार्यवाही की जाएगी !