प्रदेश भाजपा में उभर रही गुटबाजी, पार्टी के मंत्री और विधायक में बढ़ रही तल्खियां

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भोपाल। मध्यप्रदेश भाजपा में इन दिनों सब कुछ ठीक ठाक नहीं चल रहा है। इसकी बानगी प्रदेश भर के कई जिलों से सामने आ रही है। पार्टी के अंदर कार्यकर्ताओं के साथ-साथ उच्च पदों पर बैठे पदाधिकारी और जनप्रतिनिधियों में विरोध के स्वर उभर रहे है। हालिया मामला छिंदवाड़ा से सामने आया है। जहां प्रदेश अध्यक्ष हटा और छिंदवाड़ा के ताजा मामलों ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के सख्ती एक्शन वाले बयान पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसा लग रहा है कि विधायक और सांसद अपनी इन हरकतोंं से खुला प्रदेश अध्यक्ष को चैलेंज दे रहे हैं क्योंकि उन्हे मालूम है कि कोई भी सख्त कार्यवाही उन पर नहीं होगी। अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या प्रदेश अध्यक्ष इन पर कोई ठोस अनुसाशनात्मक कार्रवाई कर पाएंगे!
प्रदेश अध्यक्ष का संदेश न काफी
कार्यभार संभालते ही प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संगठन में अनुशासन और एकजुटता का संदेश दिया था। उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि सार्वजनिक बयानबाजी, आपसी खींचतान और सरकार की छवि को नुकसान पहुंचाने वाले आचरण को बर्दाश्त नहीं करेंगे। पहले तो समझाइश दी गई, फिर पचमढ़ी में ट्रेनिंग हुई और साफ लहजे में सभी को कहा गया कि यदि किसी भी तरह की गड़बड़ी की गई तो कार्रवाई की जाएगी। पार्टी में अनुशासन का पालन करना ही होगा। यह बात अब हवा हवाई होती नजर आ रही है, इधर सागर में मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और पूर्व मंत्री भूपेंद्र सिंह के बीच सुलह की कोशिश भी इसी रणनीति का हिस्सा थी। लेकिन जमीनी हकीकत अब इन दावों से उलट नजर आने लगी है।
प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री विजय शाह के ऑरेशन सिंदूर के दौरान दिए गए शर्मनाक बयान के बाद ऐसा लग रहा था कि भाजपा की नसीहत कुछ रंग लाएगी, लेकिन जैसा चाहा था वैंसा कुछ सामने नहीं दिख रहा है। भोपाल में एमडी ड्रग्स कांड के बाद हाल ही में प्रतिमा बागड़ी के सगे संबंधियों द्वारा सतना में गांजा तस्करी मामले में जीजा जी और भैया जी के रंगे हाथों पकड़े गए उससे पार्टी की भारी बेइज्जती हुई है।
आखिर कब होगी ठोस कार्रवाई?
प्रदेश भर के कई जिलों हटा, छिंदवाड़ा और सागर के बाद सतना की घटनाएं यह सवाल खड़ा कर रही हैं कि क्या भाजपा संगठन की सख्ती शायद कभी थी ही नहीं? पार्टी के भीतर गुटबाजी सिर्फ कार्यकर्ताओं तक सीमित नहीं रही, बल्कि विधायक और मंत्री भी खुलकर आमने-सामने आ गए हैं। बयानबाजी, आरोप और पोस्टर विवाद ने संगठन की अनुशासनात्मक छवि पर दबाव बढ़ा दिया है।
क्या है हटा का मामला
हटा विधानसभा से भाजपा विधायक उमा देवी ने पार्टी की बैठक में ही अपनी सरकार के दो मंत्रियों पर गंभीर आरोप जड़ दिए। प्रभारी मंत्री इंदर सिंह परमार की मौजूदगी में विधायक ने दो टूक शब्दों में कहा कि जिले के दो मंत्री लगातार उनके विधानसभा क्षेत्र में हस्तक्षेप कर रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि इन्होंने हस्तक्षेप बंद किया तो मंत्री कार्यालय खोल लें और वे इस्तीफा दे देंगी। यह बयान संगठनात्मक अनुशासन पर बड़ा सवाल बन गया है।