नई दिल्ली;सुप्रीम कोर्ट ने पर्यावरण के लिए अहम फैसला लिया है। कोर्ट ने अपने ही 20 नवंबर के उस ऑर्डर पर अंतरिम स्टे लगा दिया, जिसमें अरावली पहाड़ियों की परिभाषा को केवल 100 मीटर ऊंचाई तक सीमित किया गया था। पर्यावरण कार्यकर्ताओं के जोरदार विरोध और संभावित खतरे को देखते हुए वैकेशन बेंच ने मामले को गंभीरता से लिया और पुराने निर्देशों को फिलहाल स्थगित कर दिया। अब एक नई विशेषज्ञ कमेटी बनाई जाएगी जो अरावली की सही परिभाषा तय करेगी।
विवाद की जड़ क्या थी?
नवंबर का फैसला: अरावली हिल को स्थानीय स्तर से 100 मीटर ऊंची भूमि माना गया। रेंज: ऐसी पहाड़ियां जो 500 मीटर दायरे में जुड़ी हों।इससे हजारों छोटी-छोटी पहाड़ियां (हिलॉक्स) संरक्षित क्षेत्र से बाहर हो जातीं, अवैध खनन का खतरा बढ़ जाता।
अन्य आदेश: नई माइनिंग लीज पर रोक और सस्टेनेबल प्लान बनाने के निर्देश तो थे, लेकिन परिभाषा पर बवाल मच गया।
हरियाणा, राजस्थान और गुजरात में अरावली क्षेत्र के लोग राहत की सांस ले रहे हैं। कोर्ट की नई कमेटी से अरावली को स्थायी सुरक्षा मिलेगी।


