जमीन के खेल में बड़ा फर्जीवाड़ाः एक करोड़ की ठगी, स्टांप चोरी पर ईओडब्ल्यू का शिकंजा

जबलपुर। जमीन के सौदों में धोखाधड़ी के मामले थमने का नाम नहीं ले रहे हैं। जबलपुर में एक ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां जमीन का सौदा कर एक करोड़ रुपये की ठगी और आठ लाख की स्टांप चोरी की गई। अब आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो ने दो आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है।
जबलपुर में जमीन कारोबार से जुड़ा एक बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। ईओडब्ल्यू ने मो. आसिफ और रूपेश विश्वकर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी, आपराधिक षड्यंत्र और स्टांप चोरी सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया है। आरोप है कि दोनों ने जमीन सौदे के नाम पर शिकायतकर्ता को एक करोड़ से अधिक की चपत लगाई।
शिकायतकर्ता पुनीत टंडन ने 0.258 हेक्टेयर जमीन का सौदा आरोपियों से 1 करोड़ 3 लाख रुपये में किया था। आरोपियों ने भुगतान के लिए चेक दिया, जो बाद में बाउंस हो गया। चेक बाउंस होने के बाद पुनीत टंडन ने रजिस्ट्री होल्ड करवा दी थी, ताकि जमीन किसी और को न बेची जा सके।
लेकिन यहीं से शुरू हुआ असली खेल। रजिस्ट्री होल्ड होने के बावजूद आरोपियों ने कथित तौर पर नामांतरण करवा लिया और वही जमीन किसी तीसरे व्यक्ति को बेच दी। इतना ही नहीं, इस पूरे सौदे में करीब आठ लाख रुपये की स्टांप ड्यूटी चोरी भी की गई।
शिकायत मिलने के बाद ईओडब्ल्यू ने मामले की विस्तृत जांच की। दस्तावेजों, बैंक लेन-देन और राजस्व रिकॉर्ड की पड़ताल के बाद आरोप सही पाए गए। जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने सुनियोजित तरीके से सरकारी सिस्टम की खामियों का फायदा उठाया।
ईओडब्ल्यू अधिकारियों का कहना है कि यह मामला सिर्फ एक व्यक्ति से धोखाधड़ी का नहीं, बल्कि राजस्व को नुकसान पहुंचाने का भी है। ऐसे मामलों में सख्त कार्रवाई जरूरी है, ताकि जमीन कारोबार में पारदर्शिता बनी रहे।
यह घटना एक बार फिर बताती है कि जमीन खरीद-फरोख्त में छोटी सी लापरवाही भी भारी नुकसान में बदल सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सौदे से पहले दस्तावेजों की कानूनी जांच और रजिस्ट्री की स्थिति की पुष्टि बेहद जरूरी है।