कांग्रेस के युवा नेता को भारी पड़ा थाने का घेराव करने का ऐलान, पुलिस ने उनके घर से लिया हिरासत में

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मुरैना। लगागार बढ़ते अपराध के खिलाफ आवाज उठाना कांग्रेसी युवा नेता को महंगा पड़ गया। थाने के घेराव का ऐलान और उससे पहले आधी रात को ही पुलिस कार्रवाई मुरैना में राजनीति और कानून व्यवस्था आमने-सामने खड़ी नजर आई। सवाल यह है कि यह सुरक्षा है या असहमति को दबाने की तैयारी?
मुरैना जिले में उस वक्त गरमा गई, जब युवा कांग्रेस के विधानसभा अध्यक्ष अभिषेक पचौरी को पुलिस ने उनके घर से हिरासत में ले लिया। इस कार्रवाई में जिले के तीन थानों की पुलिस शामिल थी। यही नहीं उनके कई समर्थकों को भी बीती रात में ही हिरासत में लिया जा चुका था।
बतादें कि अभिषेक पचौरी ने शहर में बढ़ती लूट, डकैती और हत्या की घटनाओं के विरोध में शनिवार को थाने का घेराव करने का ऐलान किया था। उनका मानना है कि जिले और शहर में अपराध लगातार बढ़ रहे हैं और पुलिस उन्हें रोकने में नाकाम रही है।
शुक्रवार को ही पुलिस सक्रिय हो गई और धरपकड़ की कार्रवाई की गई। शनिवार की सुबह थाना घेराव से ठीक पहले की गई इस कार्रवाई को कांग्रेस ने राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सरकार और पुलिस प्रशासन आलोचना से बचने के लिए विपक्ष की आवाज दबा रहे हैं।
अभिषेक पचौरी हाल ही में हुई अंकित माहौर की हत्या के मामले में भी पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा चुके थे। उन्होंने आरोप लगाया था कि जांच में ढिलाई बरती जा रही है और पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिल रहा।
वहीं पुलिस का पक्ष है कि कानून व्यवस्था बनाए रखने और संभावित तनाव को रोकने के लिए यह कदम उठाया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि थाना घेराव से शांति भंग होने की आशंका थी, इसलिए एहतियातन कार्रवाई की गई।
इस घटनाक्रम के बाद मुरैना की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस समर्थकों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला बताया, जबकि प्रशासन इसे सुरक्षा से जुड़ा फैसला बता रहा है।