बालाघाट। जिले में आयोजित जिला स्तरीय ’एक जिला-एक उत्पाद (ओडीओपी) मेला इस बार केवल एक प्रदर्शनी भर नहीं रहा, बल्कि जिले की कृषि विरासत, चिन्नौर चावल की नई कहानी लिखने का मंच बन गया। जीआई टैग मिलने के बाद चिन्नौर चावल न सिर्फ देश, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी अपनी सुगंध और गुणवत्ता से पहचान बना रहा है। यही वजह है कि इस मेले में किसानों का उत्साह अपने चरम पर दिखा, और हजारों किसान अपनी परंपरा को नए अवसरों में बदलते नज़र आए।
पांच दिवसीय कृषि मेला सह प्रदर्शनी के तहत कमला नेहरू सामुदायिक भवन में आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में कृषि उद्यमियों, वैज्ञानिकों, विभागीय अधिकारियों और जिले भर से आए 1200 से अधिक किसानों ने सहभागिता की। मेले का केंद्रबिंदु रहा, बालाघाट चिन्नौर जिस पर आधारित विशेष प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किया गया। कृषि वैज्ञानिकों ने उत्पादन से लेकर उच्च गुणवत्ता वाले प्रसंस्करण, पैकेजिंग और ग्लोबल मार्केटिंग के आधुनिक मॉडल किसानों को सिखाए।
विधायक वारासिवनी विक्की पटेल और अन्य अतिथियों ने चिन्नौर को जिले की कृषि धरोहर बताते हुए इसकी ब्रांड वैल्यू को संरक्षित रखने पर जोर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि चिन्नौर का जीआई टैग किसानों के लिए केवल पहचान नहीं, बल्कि एक स्थायी आय का मजबूत आधार बन सकता है, बशर्ते किसान आधुनिक तकनीक, गुणवत्ता और नवाचार को अपनाएं।
मेले में प्राकृतिक एवं जैविक खेती के माड्यूल, नवाचार आधारित उपकरण, मिलेट्स व चिन्नौर से बने व्यंजन और स्वसहायता समूहों की प्रदर्शनी मुख्य आकर्षण रहे। चिन्नौर से बनी पारंपरिक खीर ने मेहमानों का दिल जीत लिया। कृषि विशेषज्ञों और अधिकारियों की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और प्रभावी बनाया। मेले का मूल उद्देश्य चिन्नौर चावल को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय ब्रांड के रूप में स्थापित करना और किसानों को तकनीक आधारित खेती से जोड़ना था, जो इस आयोजन से बड़ी मजबूती के साथ आगे बढ़ता दिखाई दे रहा है।


