नई दिल्ली। पूर्व सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे की किताब ‘फोर स्टार्स ऑफ डेस्टिनी’ को लेकर मचे विवाद के बाद अब रक्षा मंत्रालय सख्त कदम उठाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय सेना से जुड़े लेखन और प्रकाशन को लेकर नई गाइडलाइंस तैयार कर रहा है, जिनके तहत अब किताब लिखने से पहले अनुमति लेना अनिवार्य हो सकता है।
बिना छपे किताब पर क्यों मचा बवाल?
बता दें जनरल नरवणे और प्रकाशक पेंगुइन का कहना है कि- किताब अभी तक आधिकारिक रूप से प्रकाशित नहीं हुई है, लेकिन इसके बावजूद यह संसद परिसर में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के हाथों में देखी गई। इतना ही नहीं, एक मैगजीन में किताब के कंटेंट के आधार पर रिपोर्ट भी छप चुकी है। जानकारी के अनुसार, यह किताब फिलहाल रक्षा मंत्रालय की क्लीयरेंस के लिए लंबित है।
किताब लिखने से पहले लेनी होगी मंजूरी
जानकारी अनुसार, इस पूरे विवाद के बाद रक्षा मंत्रालय एक ऐसे नियम पर काम कर रहा है, जिसके तहत सेवा में मौजूद और रिटायर्ड, दोनों तरह के सैन्य कर्मियों को सेना से जुड़ी किताब लिखने या प्रकाशित करने से पहले मंत्रालय की अनुमति लेनी होगी। खास तौर पर यह नियम उन अधिकारियों पर लागू होगा, जो रिटायरमेंट के बाद अपने सैन्य अनुभवों पर आधारित किताबें लिखते हैं।
नई गाइडलाइंस में क्या होगा शामिल?
सूत्रों के अनुसार, नए नियमों में यह स्पष्ट किया जाएगा कि-
- किताब लिखने या छापने से पहले किस स्तर से अनुमति लेनी होगी
- क्लीयरेंस की पूरी प्रक्रिया क्या होगी
- नियमों के उल्लंघन पर किस तरह की कार्रवाई की जा सकती है
हालांकि रक्षा मंत्रालय ने अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन संकेत हैं कि ये नियम जल्द लागू किए जा सकते हैं।
ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट रहेगा सबसे अहम
रक्षा सूत्रों का कहना है कि रिटायर्ड सैनिकों को लिखने से सीधे तौर पर रोका नहीं गया है, लेकिन ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट रिटायरमेंट के बाद भी लागू रहता है। यदि कोई पूर्व सैनिक गोपनीय, संवेदनशील या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करता है, तो उसे कानूनी अपराध माना जाएगा।
किन बातों पर है पूरी तरह रोक?
नियमों के तहत निम्नलिखित बातों को प्रकाशित करने की सख्त मनाही है-
- सैन्य ऑपरेशन या रणनीति
- हथियारों की क्षमताएं
- खुफिया सूचनाएं
- राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेश नीति को प्रभावित करने वाली जानकारी
यहां तक कि काल्पनिक कहानियां भी रोकी जा सकती हैं, अगर उनमें असली सैन्य अभियानों या संवेदनशील तथ्यों की झलक मिलती है।
क्यों जरूरी माने जा रहे हैं नए नियम?
इस पर रक्षा मंत्रालय का मानना है कि- सूचना के इस दौर में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी गोपनीयता बनाए रखना सबसे बड़ी प्राथमिकता है। यही वजह है कि अब सैन्य लेखन के लिए एक स्पष्ट, सख्त और नियम लाने की दिशा में काम किया जा रहा है।


