दिल्ली में रहने से पहले जान लें ये चौंकाने वाली सच्चाई…

दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली से सामने आए ताज़ा आंकड़े स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता पैदा करते हैं। दिल्ली सरकार की जन्म और मृत्यु पंजीकरण वार्षिक रिपोर्ट 2024 के अनुसार, राजधानी में दर्ज कुल मौतों में से करीब हर तीसरी मौत घर पर हुई है। यह स्थिति बताती है कि बड़ी संख्या में लोग अस्पताल तक पहुंचने से पहले ही अपनी जान गंवा रहे हैं।

क्या बताती है रिपोर्ट

रिपोर्ट के मुताबिक, वर्ष 2024 में दिल्ली में कुल 1,39,480 मौतें दर्ज की गईं थी। इनमें से 34.84 प्रतिशत लोगों की मौत घर पर ही हुई, जबकि 65.16 प्रतिशत मौतें अस्पतालों या अन्य चिकित्सा संस्थानों में दर्ज की गईं। यानी हर तीन में से एक व्यक्ति को समय रहते मेडिकल मदद नहीं मिल सकी।

साल 2023 में भी नहीं बदली तस्वीर

अगर 2023 के आंकड़ों से तुलना करें तो स्थिति में कोई खास सुधार नहीं दिखता। जिसमें 1,32,391 मौतें दर्ज की गई थीं और तब भी घर पर होने वाली मौतों का अनुपात लगभग एक-तिहाई ही था। इससे साफ है कि यह समस्या नई नहीं, बल्कि लंबे समय से बनी हुई एक गंभीर चुनौती है।

घर पर मौतों के पीछे क्या कारण?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इसके पीछे कई वजहें हैं। सरकारी अस्पतालों में मरीजों का अत्यधिक दबाव और बेड की कमी, निजी अस्पतालों में इलाज का महंगा होना, समय पर एंबुलेंस सेवाएं न मिल पाना और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना प्रमुख कारण माने जा रहे हैं।

रिपोर्ट यह भी बताती है कि 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में मौतों की संख्या सबसे ज्यादा है, जो बुजुर्गों की देखभाल और नियमित स्वास्थ्य जांच पर सवाल खड़े करती है।

क्या देरी बन रही है जानलेवा?

डॉक्टरों के अनुसार हार्ट अटैक, स्ट्रोक, सांस की बीमारी और गंभीर संक्रमण जैसी स्थितियों में समय पर इलाज न मिलना जानलेवा साबित हो सकता है। घर पर होने वाली मौतें इस बात का संकेत हैं कि इमरजेंसी के समय सिस्टम और जन-जागरूकता दोनों कमजोर पड़ रहे हैं।

आगे क्या ज़रूरी?

विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करना, अस्पताल पहुंचने में देरी न करना, इमरजेंसी सेवाओं को मजबूत करना और बुजुर्गों की नियमित स्वास्थ्य जांच बेहद जरूरी है।

दिल्ली के ये आंकड़े सिर्फ चिंता जताने के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य व्यवस्था में सुधार की तत्काल जरूरत को दिखाने के लिए हैं। अगर समय रहते कदम उठाए जाएं, तो कई कीमती जिंदगियां बचाई जा सकती हैं।