लांजी। संयुक्त क्रांति पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व विधायक किशोर समरीते ने 13 फरवरी 2026 को जनसंपर्क कार्यालय बालाघाट द्वारा दुल्हापुर प्रकरण में जारी खंडन पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि- यह प्रशासन का अंग्रेजों के समय का पुराना तरीका है। देश में संविधान का राज है और किसी भी घटना की जांच व पंचनामा कार्यवाही बार-बार नहीं होती। लांजी एसडीएम और तहसीलदार दुल्हापुर प्रकरण में कलेक्टर को गुमराह कर रहे हैं।
वहीं पूर्व विधायक ने मांग करते हुए कहा कि- संबंधित अधिकारियों की टूर डायरी की जांच की जाए और यह देखा जाए कि पटवारी ने कितनी बार मौका निरीक्षण किया है। संबंधित मकान का निर्माण ग्राम पंचायत दुल्हापुर एवं नगर निवेश की अनुमति से किया जा रहा है या नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि बिना डायवर्सन कराए मकान निर्माण कराना गैरकानूनी है। किशोर समरीते ने आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार में दो सदस्य जन्म से दिव्यांग हैं और उनके पास आजीविका का कोई साधन नहीं है। ऐसे में प्रशासन को कमजोर पक्ष के साथ खड़ा होना चाहिए, न कि खंडन जारी करना चाहिए। दुल्हापुर के पटवारी के बस्ते जब्त कर जांच की जाए और ग्राम पंचायत सचिव की भूमिका की भी जांच हो।
साथ ही समरीते ने संविधान के अनुच्छेद 41, दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम 2016 तथा संबंधित धाराओं का हवाला देते हुए कहा कि- सरकार को प्राथमिकता के आधार पर दिव्यांगजनों की सहायता करनी चाहिए। उन्होंने एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, पटवारी एवं ग्राम पंचायत सचिव को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग भी की।
वहीं दुल्हापुर निवासी उर्वशी पति स्व. सावालाल बरगैया एवं उनके पुत्र ईश्वर बरगैया और मीना बरगैया ने कहा कि उन्होंने किसी को गुमराह नहीं किया है। उनका आरोप है कि अनावेदक सुखदेव बरगैया एवं उसके परिजन प्रशासनिक अधिकारियों के निरीक्षण के समय कार्य बंद कर देते हैं और अधिकारियों के जाने के बाद पुनः कार्य प्रारंभ कर देते हैं। उन्होंने शासन-प्रशासन से क्षतिग्रस्त मकान की मरम्मत तथा दोनों दिव्यांग भाई-बहन के लिए रोजगार सहायता की मांग की।


