नोएडा। फरवरी 2026 में दिल्ली में आयोजित India AI Impact Summit के दौरान गलगोटिया यूनिवर्सिटी विवादों में आ गई है। जिसमें मामला एक रोबोटिक डॉग “Orion” से जुड़ा है, जिसे गलगोटिया यूनिवर्सिटी द्वारा प्रदर्शित किया गया था। लेकिन यह वास्तव में एक विदेशी कंपनी का रेडीमेड मॉडल है। जिसके बाद देश विदेश में रोबोटिक डॉग को लेकर बहस छिड़ गई। जब किसी यूनिवर्सिटी के मालिक ने फर्जीबाड़ा किया हो, तो उसकी यूनिवर्सिटी कैसे बेदाग हो सकती है।
क्या था मामला?
दरअसल यह मामला 2014 में गल्गोटिया समूह से जुड़े कुछ शीर्ष प्रबंधन सदस्यों के खिलाफ दर्ज एक वित्तीय मामले ने उस समय शिक्षा जगत और कारोबारी हलकों में हलचल मचा दी थी। जानकारी के मुताबिक गलगोटिया यूनिवर्सिटी का सीईओ ध्रुव गलगोटिया अपनी मां पद्मिनी के साथ करोड़ों के फर्जीवाड़े में जेल भेज दिया गया था। इन लोगों ने एक SE इंवेस्टमेंट नामक फाइनेंसियल एजेंसी से 80 करोड़ का लोन लिया था। लोन ना चुका पाने के बाद में यह रकम 122 करोड़ हो गई। फिर यह पैसा वापस करने से मुकर गए।
इन्होंने न्यायालय में भी झूठ बोला और यूजीसी से झूठ बोलकर ग्रांट लेते रहे। लेकिन वित्तीय संस्था की ओर से कथित तौर पर नोटिस भेजे गए और बाद में पुलिस आगरा के थाना हरीपर्वत में दर्ज शिकायत के आधार पर पुलिस ने मामला दर्ज किया। मामले पर बताया गया कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की अदालत ने कुछ आरोपियों के खिलाफ गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी किया गया था।
बैलेंस शीट और वित्तीय दस्तावेजों पर आरोप
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि संबंधित संस्था ने अलग-अलग बैलेंस शीट प्रस्तुत कीं, जिनमें वित्तीय स्थिति के अलग-अलग चित्र दिखाए गए थे। इन आरोपों की जांच पुलिस और न्यायालयीय प्रक्रिया के तहत की गई। हाल के विवादों के बाद 2014 का यह मामला फिर चर्चा में आया। कुछ पोस्ट्स में पुराने आरोपों को भी वर्तमान घटनाओं से जोड़ा गया।


