जबलपुर। मध्यप्रदेश में शहरी निकाय से जुड़ा एक बड़ा कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है। जहां Economic Offences Wing (EOW) जबलपुर ने लखनादौन नगर पालिका परिषद में दुकानों के आवंटन से जुड़े मामले में करीब दो दर्जन लोगों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज किया है। आरोपियों में तत्कालीन मुख्य नगर पालिका अधिकारी (CMO), राजस्व विभाग के अधिकारी और कुछ राजनीतिक पदाधिकारी भी शामिल बताए गए हैं।
क्या है आरोप?
जानकारी अनुसार, EOW की प्राथमिक जांच में सामने आया कि शॉपिंग कॉम्प्लेक्स में बनी दुकानों की नीलामी प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई। आरोप है कि-
- नीलामी के बाद पूर्ण प्रीमियम राशि जमा कराए बिना दुकानों का कब्जा सौंप दिया गया।
- कई मामलों में विधिवत अनुबंध किए बिना ही दुकानदारों को संचालन की अनुमति दे दी गई।
- आरक्षित वर्ग के लिए चिन्हित दुकानों का आवंटन कथित रूप से सामान्य वर्ग के आवेदकों को कर दिया गया।
जांच में यह भी पाया गया कि 32 में से 13 दुकानदारों ने लगभग 79.82 लाख रुपये की नीलामी राशि जमा नहीं की, जबकि वे बिना वैध अनुबंध के दुकानें संचालित कर रहे थे। इसके अतिरिक्त करीब 2.88 लाख रुपये किराया भी नियमानुसार वसूल नहीं किया गया।
किन धाराओं में मामला दर्ज?
बता दें मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 409 और 120B के साथ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की संबंधित धाराओं के तहत अपराध क्रमांक 43/2026 पंजीबद्ध किया गया है।
EOW के अनुसार, यह केस वित्तीय अनियमितताओं, पद के दुरुपयोग और शासन को आर्थिक क्षति पहुंचाने से जुड़ा है।
आगे क्या?
एजेंसी अब दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच, वित्तीय ट्रांजेक्शन की ट्रेल और संबंधित अधिकारियों की भूमिका का विस्तृत परीक्षण कर रही है। सूत्रों का कहना है कि आगे और नाम सामने आ सकते हैं।
यह कार्रवाई राज्य में लोकल बॉडी गवर्नेंस और पब्लिक फंड मैनेजमेंट की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े करती है। आने वाले दिनों में जांच की दिशा और संभावित गिरफ्तारी पर नजर रहेगी।


