नई दिल्ली। फर्जी बैंक गारंटी के जरिए सरकारी एजेंसियों से भारी रकम निकालने के मामले में बड़ा खुलासा हुआ है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने तीर्थ गोपिकॉन लिमिटेड (TGL) और उसके प्रमोटर्स से जुड़ी करीब 10.80 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियां कुर्क की हैं। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत की गई है।
कैसे चला पूरा स्कैम?
बता दें जांच में सामने आया कि तीर्थ गोपिकॉन लिमिटेड (TGL) ने एक सुनियोजित तरीके से फर्जी बैंक गारंटी का इस्तेमाल किया। सरकारी प्रोजेक्ट्स के लिए नकली बैंक गारंटी जमा की गई। दस्तावेजों को असली दिखाने के लिए फर्जी ईमेल सिस्टम तैयार किया गया। इन गारंटी के आधार पर करीब 202.01 करोड़ रुपये का एडवांस लिया गया। यह पूरा ऑपरेशन ‘डिजिटल फ्रॉड + डॉक्यूमेंट फर्जीवाड़ा’ का कॉम्बिनेशन था।

किन एजेंसियों को बनाया गया निशाना?
सूत्रों के मुताबिक, घोटाले में दो बड़ी सरकारी संस्थाओं को टारगेट किया गया जिसमें-
- Madhya Pradesh Jal Nigam Maryadit
- Rajasthan Renewable Energy Corporation Limited
इन संस्थाओं को जाली बैंक गारंटी के आधार पर भुगतान जारी करने के लिए गुमराह किया गया।
जांच में यह भी सामने आया कि आरोपियों ने ‘pnb-india.co’ नाम से नकली ईमेल डोमेन बनाया, जो Punjab National Bank जैसा दिखता था। इसी डोमेन से फर्जी वेरिफिकेशन मेल भेजे गए और गारंटी को असली साबित किया गया। साथ ही में सरकारी एजेंसियों से पेमेंट रिलीज करवा लिया गया।
पैसा कैसे घुमाया गया?
ED की जांच में ‘मनी लेयरिंग’ का बड़ा नेटवर्क सामने आया है, जिसमें पहले रकम TGL के खातों में आई, फिर करीब 22.12 करोड़ रुपये अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किए गए, प्रमोटर्स और परिवार के निजी खातों में पैसा शिफ्ट हुआ, अंत में इस पैसे को इंदौर और अहमदाबाद में प्रॉपर्टी खरीदने में लगाया गया। जिसके बाद इन्हीं संपत्तियों को अब अटैच किया गया है।

कौन-कौन हैं आरोपी?
इस केस में कई बड़े नाम सामने आए हैं:
- महेश कुम्भानी (MD)
- मोहम्मद फिरोज खान
- गोविंद चंद्र हांसदा
- गौरव धाकड़
- राहुल गुप्ता
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इन आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट भी दाखिल कर दी है।


