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 “PM मोदी आतंकवादी…” मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर भड़की BJP

दिल्ली। देश की राजनीति में एक बार फिर बयानों की तीखी टकराहट देखने को मिल रही है। मल्लिकार्जुन खरगे के एक बयान ने नया विवाद खड़ा कर दिया है, जिसमें उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान नरेंद्र मोदी को लेकर ‘आतंकी’ शब्द का इस्तेमाल किया। बयान सामने आते ही राजनीतिक माहौल गर्म हो गया और विपक्ष व सत्ता पक्ष के बीच नैरेटिव वॉर शुरू हो गया।

क्या कहा गया और कैसे बदला संदर्भ?

दरअसल, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दिए गए बयान पर जब विवाद बढ़ा, तो खरगे ने तुरंत क्लैरिफिकेशन मोड में आते हुए कहा कि उनका आशय ‘आतंकवादी’ कहना नहीं था, बल्कि यह था कि प्रधानमंत्री राजनीतिक दलों और लोगों को ‘आतंकित’ (intimidate) कर रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों का इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए किया जा रहा है और राजनीतिक विरोधियों को टारगेट किया जा रहा है। साथ ही लोकतांत्रिक संस्थाओं पर नियंत्रण की कोशिश हो रही है।

किस मुद्दे पर बोल रहे थे खरगे?

जानकारी के मुताबिक, यह पूरा बयान तमिलनाडु की राजनीति को लेकर आया, जहां AIADMK और भारतीय जनता पार्टी के गठबंधन पर सवाल उठाए जा रहे थे। खरगे ने कहा कि यह गठबंधन सामाजिक न्याय और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है। इससे सी. एन. अन्नादुरै, के. कामराज, पेरियार ई. वी. रामासामी और बी. आर. आंबेडकर जैसे नेताओं की विचारधारा कमजोर होती है।

बीजेपी का कड़ा पलटवार

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर सफाई के बावजूद भारतीय जनता पार्टी ने इसे हल्के में लेने से इनकार कर दिया। पार्टी ने इसे सिर्फ एक शब्द विवाद नहीं, बल्कि प्रधानमंत्री पद की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं पर हमला बताया और पूरे मामले को राष्ट्रीय स्तर पर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना दिया।

प्रदीप भंडारी: कांग्रेस की सोच उजागर

प्रदीप भंडारी ने इस बयान पर सबसे आक्रामक प्रतिक्रिया देते हुए कांग्रेस पर सीधा वैचारिक हमला बोला। उन्होंने कहा कांग्रेस अब अर्बन नक्सल माइंडसेट के साथ काम कर रही है। इस तरह की भाषा कोई गलती नहीं, बल्कि सोची-समझी रणनीति है। यह बयान दिखाता है कि कांग्रेस राजनीतिक विरोध को व्यक्तिगत हमलों में बदल रही है। भंडारी ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस लगातार ऐसे बयान देकर नैरेटिव को भटकाने और सहानुभूति बटोरने की कोशिश करती है।

पीयूष गोयल: 140 करोड़ लोगों का अपमान

पीयूष गोयल ने इस बयान को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि यह केवल प्रधानमंत्री का नहीं, बल्कि देश की जनता का अपमान है, जिन्होंने लोकतांत्रिक तरीके से सरकार चुनी है। उन्होंने अपने बयान में कहा कांग्रेस और उसके सहयोगियों ने राजनीति का स्तर गिरा दिया है। ऐसे शब्दों का इस्तेमाल लोकतंत्र के मूल्यों के खिलाफ है। कांग्रेस नेतृत्व को देश से सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए। गोयल ने यह भी जोड़ा कि इस तरह की भाषा से कांग्रेस की हताशा और राजनीतिक निराशा झलकती है।

संबित पात्रा: सुनियोजित राजनीतिक पैटर्न

संबित पात्रा ने इस विवाद को एक बड़े पैटर्न से जोड़ते हुए कहा कि यह कोई पहली घटना नहीं है। उनके मुताबिक कांग्रेस नेतृत्व के इशारे पर बार-बार प्रधानमंत्री पर व्यक्तिगत हमले किए जाते हैं। यह एक सिस्टमेटिक पॉलिटिकल कम्युनिकेशन स्ट्रैटेजी है। इसका उद्देश्य है जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाना। पात्रा ने यह भी आरोप लगाया कि कांग्रेस ने पहले भी कई मौकों पर आपत्तिजनक और विवादित शब्दों का इस्तेमाल किया है।

मनजिंदर सिंह सिरसा: लोकतंत्र में ऐसी भाषा अस्वीकार्य

मनजिंदर सिंह सिरसा ने बयान को शर्मनाक और अत्यंत आपत्तिजनक बताते हुए कहा कि लोकतंत्र में विचारों का विरोध स्वीकार्य है, लेकिन इस तरह की भाषा नहीं। प्रधानमंत्री देश के 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ऐसे बयान राजनीतिक असहमति को नफरत में बदलते हैं। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि खरगे को तुरंत देश से माफी मांगनी चाहिए। कांग्रेस को अपनी भाषा और राजनीतिक संस्कृति पर पुनर्विचार करना चाहिए।

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