न्यूयॉर्क। उद्योगपति गौतम अडाणी को अमेरिका में चल रहे रिश्वत और धोखाधड़ी के मामले में बड़ी कानूनी राहत मिली है। ब्रुकलिन की अमेरिकी जिला अदालत ने सोमवार को उनके खिलाफ चल रहे मामले को खारिज कर दिया। अमेरिकी न्याय विभाग ने अदालत से केस खत्म करने की मांग की थी, जिसे जज निकोलस गारौफिस ने मंजूरी दे दी।
यह मामला करीब दो साल पहले शुरू हुआ था। अमेरिकी अभियोजकों ने 2024 में गौतम अडाणी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने भारतीय सरकारी अधिकारियों को कथित तौर पर रिश्वत देने पर सहमति जताई थी, ताकि अडाणी ग्रुप की एक सहायक कंपनी को सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट का ठेका मिल सके। अडाणी ग्रुप ने इन आरोपों को लगातार खारिज किया था।
अडाणी ने कहा- न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करता हूं
अमेरिकी अदालत के फैसले के बाद गौतम अडाणी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वह न्यायिक प्रक्रिया के प्रति विनम्रता और गहरे सम्मान के साथ अमेरिकी अदालत के फैसले का स्वागत करते हैं।
केस खारिज होने के फैसले से अडाणी समूह के खिलाफ अमेरिका में चल रही इस कानूनी कार्रवाई का अंत हो गया है।
10 अरब डॉलर के निवेश के वादे का भी जिक्र
इस मामले में अमेरिका में अडाणी के 10 अरब डॉलर के निवेश के वादे को लेकर भी विवाद सामने आया था। अडाणी ने 15 जुलाई को अदालत में दिए एक एफिडेविट में कहा था कि उन्हें ऐसे किसी समझौते की जानकारी नहीं थी।
हालांकि, उन्होंने यह स्वीकार किया था कि वह पहले अमेरिका में 10 अरब डॉलर निवेश करने का वादा कर चुके थे। अडाणी के मुताबिक, उनके वकीलों ने अमेरिकी न्याय विभाग के साथ हुई बैठकों में यह बात रखी थी कि निवेश का यह वादा मामले के समाधान का हिस्सा हो सकता है।
जज ने निवेश प्रस्ताव पर कोई राय नहीं दी
जज निकोलस गारौफिस ने स्पष्ट किया कि वह इस बात पर कोई राय नहीं दे रहे हैं कि रिश्वत के मामले को खत्म करने के लिए इस तरह के वित्तीय प्रस्ताव उचित थे या नहीं।
उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे प्रस्तावों का कानून के समान और निष्पक्ष अनुप्रयोग पर क्या प्रभाव पड़ता है, इस पर फैसला जनता को करना है।
न्याय विभाग ने मई में ही केस खत्म करने की मांग की थी
अमेरिकी न्याय विभाग ने 18 मई को अदालत को बताया था कि वह इस मामले को आगे नहीं बढ़ाना चाहता। हालांकि, मामले को कानूनी रूप से समाप्त करने के लिए अदालत की मंजूरी जरूरी थी।
इसके बाद अंतिम फैसला अमेरिकी जिला अदालत के जज निकोलस गारौफिस को करना था। सोमवार को अदालत ने न्याय विभाग की मांग स्वीकार करते हुए केस खारिज कर दिया।

