दिल्ली। अभिनेता मनोज बाजपेयी की आगामी फिल्म ‘घूसखोर पंडित’ का टीज़र सामने आते ही देश के कई हिस्सों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। फिल्म के शीर्षक में ‘पंडित’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर ब्राह्मण समाज और विभिन्न धार्मिक संगठनों ने आपत्ति जताई है। जिसके बाद प्रदर्शन, ज्ञापन और कानूनी कार्रवाई की मांग के साथ यह विवाद अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन चुका है।
आस्था और पहचान पर सीधा प्रहार
बता दें विरोध कर रहे संगठनों का कहना है कि फिल्म का नाम केवल एक काल्पनिक किरदार तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे पूरे ब्राह्मण समाज की छवि को नकारात्मक रूप में पेश किया जा रहा है। उनका आरोप है कि हाल के वर्षों में कुछ वर्गों को जानबूझकर निशाना बनाकर उनकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाई जा रही है, जो गंभीर चिंता का विषय है।
उज्जैन में उग्र प्रदर्शन
वहीं महाकाल की नगरी उज्जैन में अखिल भारतीय युवा ब्राह्मण समाज ने खुलकर विरोध दर्ज कराया। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि यह सिर्फ एक फिल्म का मुद्दा नहीं, बल्कि परंपरा, संस्कृति और स्वाभिमान की रक्षा की लड़ाई है। प्रदर्शनकारियों ने साफ किया कि जब तक शीर्षक बदला नहीं जाता और आपत्तिजनक सामग्री हटाई नहीं जाती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
दिल्ली हाईकोर्ट तक पहुंचा मामला
फिल्म के खिलाफ दिल्ली उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई है, जिसमें इसे अपमानजनक बताते हुए रिलीज पर रोक लगाने की मांग की गई है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह कंटेंट सामाजिक सौहार्द बिगाड़ सकता है और धार्मिक भावनाओं को आहत करता है।
नेटफ्लिक्स के खिलाफ पुलिस में शिकायत
सूत्रों से पता चला है कि- संविधान सम्मान मंच के पदाधिकारी करन सिंह ने मुंबई के बीकेसी पुलिस स्टेशन में नेटफ्लिक्स के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उनका आरोप है कि प्लेटफॉर्म ऐसे कंटेंट को जगह दे रहा है, जो देश की छवि और सामाजिक संतुलन को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि जब तक माफी नहीं मांगी जाती और आपत्तिजनक हिस्से नहीं हटाए जाते, तब तक विरोध जारी रहेगा।
विवाद की जड़ क्या है?
टीज़र में मनोज बाजपेयी दिल्ली पुलिस के सीनियर इंस्पेक्टर अजय दीक्षित की भूमिका में नजर आ रहे हैं, जिन्हें लोग ‘पंडित’ के नाम से जानते हैं। फिल्म में उनका किरदार एक भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के रूप में दिखाया गया है। विरोध करने वालों का कहना है कि इस तरह के चरित्र को ‘पंडित’ नाम से जोड़ना पूरे समुदाय को कटघरे में खड़ा करने जैसा है।
फिलहाल, ‘घूसखोर पंडित’ को लेकर देशभर में बहस तेज है और आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।


