मुख्य सचिव हाजिर हों…भागीरथपुरा दूषित पानी मामले में हाईकोर्ट ने दिया आदेश

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इंदौर। देश के सबसे स्वच्छ शहर के तमगे से नवाजे गए इंदौर में दूषित पानी से हुई मौतों ने प्रशासनिक दावों की पोल खोल दी है। भागीरथपुरा मामले की सुनवाई में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्य सचिव को तलब कर लिया है।
मध्यप्रदेश के सबसे चर्चित भागीरथपुरा दूषित पानी मामले में मंगलवार को इंदौर हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सख्त टिप्पणी करते हुए राज्य सरकार को कठघरे में खड़ा किया। दूषित पानी पीने से हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के बीमार होने के मामले में दाखिल याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 15 जनवरी को होने वाली अगली सुनवाई में मध्यप्रदेश सरकार के मुख्य सचिव को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
याचिकाकर्ता और हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रितेश ईरानी ने बताया कि भागीरथपुरा क्षेत्र में गंदे पानी की आपूर्ति के कारण अब तक 16 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से बीमार हुए हैं। इस गंभीर मसले को लेकर 3 से 4 याचिकाएं हाईकोर्ट में दाखिल की गई थीं, जिन पर मंगलवार को एक साथ सुनवाई हुई।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने नगर निगम और जिला प्रशासन द्वारा मृतकों की संख्या को लेकर प्रस्तुत की गई स्टेटस रिपोर्ट पर कड़ी नाराजगी जताई। न्यायालय ने संबंधित विभागों को फटकार लगाते हुए स्पष्ट किया कि आंकड़ों में अस्पष्टता और जिम्मेदारी से बचने की प्रवृत्ति किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है।
हाईकोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि यह मामला न केवल गंभीर बल्कि अत्यंत संवेदनशील है। देशभर में स्वच्छता के लिए उदाहरण माने जाने वाले इंदौर जैसे शहर में दूषित पानी से मौतों की घटना प्रशासनिक विफलता की ओर इशारा करती है। कोर्ट ने इस स्थिति पर आश्चर्य भी व्यक्त किया और कहा कि नागरिकों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना सरकार और स्थानीय प्रशासन की बुनियादी जिम्मेदारी है।
न्यायालय के इस सख्त रुख के बाद अब सभी की निगाहें 15 जनवरी की सुनवाई पर टिकी हैं, जहां मुख्य सचिव की मौजूदगी में सरकार से जवाब-तलब होगा।