उज्जैन। एक किसान की कहानी सिस्टम की संवेदनहीनता की तस्वीर बन गई है। 9 महीने पहले चोरी हुई भैंस और बछड़े की तलाश में थक-हारकर किसान अब पुलिस नहीं, बल्कि न्याय के देवता शनिदेव के दरबार में गुहार लगाने पहुंचा है।
उज्जैन जिले की झारड़ा तहसील अंतर्गत आने वाले लोटिया जुनार्दा गांव का यह मामला प्रशासनिक व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। किसान हरिसिंह की दो भैंस और एक बछड़ा 9 महीने पहले चोरी हो गए थे।
हरिसिंह ने थाने में शिकायत दर्ज कराई, सीएम हेल्पलाइन और जनसुनवाई में भी गुहार लगाई, लेकिन नतीजा शून्य रहा। महीनों तक दफ्तरों के चक्कर काटने के बाद भी जब कोई सुनवाई नहीं हुई, तो किसान ने इंसाफ के लिए भगवान शनि देव का दरवाजा खटखटाया।
किसान का कहना है कि न्याय की गुहार लगाते-लगाते उसकी चप्पल घिस गई, लेकिन प्रशासन नहीं जागा। उल्टा, बार-बार पूछने पर अधिकारियों का व्यवहार भी अभद्र होता गया।
हताश होकर हरिसिंह शनि मंदिर पहुंचे और ज्ञापन सौंपकर मांग की कि या तो उसके पशु वापस दिलाए जाएं या फिर दोषी चोरों और लापरवाह अधिकारियों को दंड मिले।
यह मामला केवल एक किसान की पीड़ा नहीं, बल्कि उस व्यवस्था का आईना है जहां शिकायत दर्ज होना समाधान की गारंटी नहीं बन पाता। सवाल यह है कि जब आम आदमी को इंसाफ के लिए देवताओं के दरबार में जाना पड़े, तो सिस्टम की जवाबदेही कौन तय करेगा?
9 महीने बाद भी भैंस नहीं मिली, किसान ने शनिदेव से मांगा न्याय


