भोपाल। मध्य प्रदेश के उपभोक्ताओं को नए वित्त वर्ष की शुरुआत के साथ ही महंगी बिजली का झटका लग सकता है। प्रदेश की बिजली कंपनियों ने घाटे और कर्ज की भरपाई के लिए दरों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव विद्युत विनियामक आयोग को भेजा है। यदि इस प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो 1 अप्रैल से प्रति यूनिट दामों में इजाफा तय है।
सब्सिडी और कर्ज का गणित
सूत्रों के अनुसार, सरकार द्वारा 100 यूनिट तक दी जाने वाली भारी सब्सिडी और कंपनियों पर बढ़ते कर्ज के बोझ के कारण यह स्थिति बनी है। हालांकि, अंतिम फैसला विनियामक आयोग को लेना है, लेकिन इस संभावित बढ़ोतरी का सीधा असर न केवल घरेलू उपभोक्ताओं पर, बल्कि किसानों और उद्योगों पर भी पड़ेगा। बिजली कंपनियों के खर्च और राजस्व के अंतिम आंकड़ों के आधार पर नई दरों का निर्धारण किया जाएगा।
मुख्य बातें:
राज्य की डिस्कॉम कंपनियों ने Madhya Pradesh Electricity Regulatory Commission (MPERC) के सामने 10.19% तक टैरिफ बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है।
1 अप्रैल 2026 से नई दरें लागू हो सकती हैं।
1 करोड़ से ज्यादा घरेलू उपभोक्ताओं पर असर।
औसतन, 400 यूनिट इस्तेमाल करने वाले परिवार का बिल महीने में ₹300 तक बढ़ सकता है (सालाना ₹3600+ अतिरिक्त बोझ)।
ये प्रस्ताव अभी सुनवाई के दौर में है, अंतिम फैसला MPERC का होगा।
बिहार में भी इसी तरह की खबर है। बिजली कंपनियों ने 35 पैसे प्रति यूनिट तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया है (पुराने बकाए की भरपाई के लिए)। बिहार विद्युत विनियामक आयोग सुनवाई पूरी कर चुका है, और मार्च में फैसला आ सकता है। अगर लागू हुआ तो नए वित्त वर्ष (2026-27) से प्रभावी।
अन्य राज्यों में (जैसे त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश आदि) भी कुछ प्रस्ताव हैं, लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर कोई एकसमान बढ़ोतरी नहीं है। हर राज्य के अपने रेगुलेटरी कमीशन तय करते हैं। कुछ जगहों पर (जैसे आंध्र प्रदेश) अभी कोई बढ़ोतरी नहीं होने की बात कही गई है।


