किरनापुर। जनपद पंचायत किरनापुर अंतर्गत ग्राम पंचायत देवगांव में हुए कथित लाखों के भ्रष्टाचार ने अब बड़ा रूप ले लिया है। शिकायतों की लंबी फेहरिस्त, जांच में सामने आई गड़बड़ियाँ और सात से आठ माह से ठंडी पड़ी कार्रवाई, इन सबने प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि विकास कार्यों के नाम पर कागजों में खेल रचा गया। फाइलों में योजनाएं पूरी दिखाई गईं, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
जांच के दौरान वित्तीय अनियमितताओं के संकेत मिलने की बात सामने आई है। सवाल यह है कि जब दस्तावेज ही गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहे हैं, तो कार्रवाई अब तक क्यों नहीं,जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए, उन्होंने पंचायत स्तर पर हो रहे वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिन्ह खड़े कर दिए हैं। सूत्रों के अनुसार, विकास कार्यों- जैसे निर्माण, सामग्री खरीदी एवं अन्य योजनाओं में लाखों रुपये की कथित अनियमितताएँ पाई गईं।
शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि कागजी दस्तावेजों में कार्य पूर्ण दर्शाए गए, जबकि जमीनी स्तर पर कार्य अधूरे या संदिग्ध पाए गए।जनपद पंचायत स्तर पर हुई जांच में दस्तावेजों के आधार पर वित्तीय गड़बड़ियों मिलने की बात सामने आई है। हालांकि, जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है, जिससे ग्रामीणों के बीच असमंजस और आक्रोश की स्थिति बनी हुई है।
क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि जांच के प्रारंभिक चरण से ही कुछ अधिकारिय भगवान सैय्याम पर पक्षपातपूर्ण रवैया अपनाने के आरोप लगते रहे। लेकिन कार्रवाई में हो रही देरी ने कई सवालों को जन्म दिया है।
जांच में अनियमितताएँ, लेकिन कार्रवाई गायब
सूत्रों के अनुसार, ग्राम पंचायत देवगांव से जुड़ी शिकायतों पर जनपद पंचायत स्तर पर की गई जांच में लाखों रुपये की कथित हेराफेरी के संकेत दर्ज हुए। दस्तावेजों में विसंगतियाँ सामने आने के बावजूद अब तक किसी पर ठोस प्रशासनिक प्रहार नहीं हुआ।
क्षेत्र में चर्चा है कि जांच के शुरुआती दिनों से ही अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठते रहे। आरोप है कि शिकायतों को फाइलों में कैद कर ‘लीपापोती’ की गई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कार्रवाई में देरी ने संदेह को और गहरा कर दिया है।
गांव में गूंज रहा सवाल – “किसके संरक्षण में?”
देवगांव के ग्रामीणों के बीच एक ही चर्चा है, यदि जांच में भ्रष्टाचार की परतें खुल चुकी हैं, तो जिम्मेदारों पर कार्रवाई से परहेज क्यों? क्या मामला दबाने का प्रयास हो रहा है? क्या प्रभाव और दबाव के कारण फाइलें अलमारियों में बंद कर दी गई हैं?
तीन से चार माह का सन्नाटा
बता दें शिकायत दर्ज हुए महीनों बीत गए, पर कार्रवाई का कोई स्पष्ट परिणाम सामने नहीं आया। प्रशासन की यह चुप्पी खुद कई सवालों को जन्म दे रही है। यदि दोष सिद्ध हुए हैं, तो दंड कहाँ है? और यदि नहीं, तो स्पष्ट रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की जाती?
निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की मांग तेज
ग्राम पंचायत देवगांव के ग्रामीणों और सामाजिक संगठनों ने अब उच्चस्तरीय स्वतंत्र जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि पंचायत व्यवस्था की साख बचानी है तो दोषियों पर कठोर कार्रवाई आवश्यक है।


