नई दिल्ली। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर व्हाइट हाउस द्वारा जारी फैक्टशीट में 24 घंटों के भीतर कई अहम संशोधन किए गए। शुरुआत में जिन बिंदुओं को डील का हिस्सा बताया गया था, संशोधित दस्तावेज में वे या तो नरम कर दिए गए या पूरी तरह हटा दिए गए, विशेषकर वे हिस्से जो भारत के लिए संवेदनशील थे।
सबसे बड़ा बदलाव दालों पर आयात शुल्क से जुड़े दावे में देखने को मिला। पहले कहा गया था कि भारत कुछ दालों पर शुल्क कम करेगा, लेकिन संशोधित संस्करण में यह पूरा संदर्भ ही गायब है। भारत, जो दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता है, लंबे समय से उच्च शुल्क के जरिए अपने किसानों की रक्षा करता आया है। बदलाव साफ संकेत देता है कि इस मुद्दे पर भारत की आपत्ति प्रभावी रही।
दूसरा महत्वपूर्ण संशोधन कृषि उत्पाद शब्द को हटाने का है। पहले कहा गया था कि भारत 500 अरब डॉलर से अधिक के ऊर्जा, सूचना-संचार प्रौद्योगिकी, कृषि और अन्य अमेरिकी उत्पाद खरीदेगा। नए दस्तावेज में कृषि शब्द गायब है और “प्रतिबद्ध” की जगह “इरादा” लिखा गया है, यानी यह कोई पक्का वादा नहीं, बल्कि संभावित दिशा बताता है।
इसी तरह डिजिटल सर्विस टैक्स हटाने के दावे को भी संशोधित फैक्टशीट से हटा दिया गया है। अब सिर्फ इतना कहा गया है कि भारत डिजिटल व्यापार से जुड़े नियमों पर बातचीत के लिए तैयार है। इन बदलावों से साफ है कि व्यापार वार्ता में भारत की स्थिति और संवेदनशील मुद्दों पर उसकी कड़ी आपत्तियां अमेरिकी दस्तावेज में भी प्रभाव दिखाने लगी हैं।
अमेरिका की फैक्टशीट में बड़ा बदलाव, दालों और कृषि दावों को चुपचाप हटाया


