ग्वालियर। मध्यप्रदेश में भारत सरकार की महत्वाकांक्षी प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत एक गंभीर और सुनियोजित धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (EOW) भोपाल ने ग्वालियर और श्योपुर जिलों से जुड़े इस मामले में जीवित व्यक्तियों को मृत दर्शाकर बीमा राशि हड़पने के आरोप में कई लोगों के खिलाफ अपराध पंजीबद्ध किया है। जांच में सरकारी विभागों, बैंक कर्मचारियों और निजी व्यक्तियों की आपराधिक साठगांठ उजागर हुई है।
कब और कैसे सामने आया मामला
जानाकारी अनुसार इस पूरे प्रकरण की शुरुआत 20 जनवरी 2025 को प्राप्त एक शिकायत से हुई थी, जिसमें आरोप लगाया गया कि प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना के तहत फर्जी दस्तावेजों के आधार पर बीमा क्लेम निकाले जा रहे हैं। जिसके बाद शिकायत की जांच आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ, इकाई ग्वालियर द्वारा की गई। विस्तृत सत्यापन के बाद 16 जनवरी 2026 को भोपाल EOW थाने में शून्य पर FIR प्रस्तुत की गई, जिसे असल अपराध क्रमांक पर दर्ज किया गया।
क्या है प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना
यह योजना भारत सरकार द्वारा वर्ष 2015 में शुरू की गई थी। जिसका उद्देश्य कम प्रीमियम में नागरिकों को जीवन बीमा सुरक्षा प्रदान करना है। इसमें आयु सीमा: 18 से 50 वर्ष, बीमा राशि: 2 लाख रुपये, प्रीमियम: पहले 330 रुपये, बाद में 436 रुपये वार्षिक और मृत्यु होने पर राशि सीधे नामिनी के खाते में दी जाती है।
जाने फर्जीवाड़े का पूरा तरीका
जांच में यह स्पष्ट हुआ कि आरोपियों ने एक सुनियोजित नेटवर्क के तहत इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। उन्होंने पहले गरीब और सामान्य नागरिकों के बैंक खाते खुलवाए, फिर खातों की चेकबुक, एटीएम और पासबुक आरोपियों ने अपने पास रखी। जिसके बाद फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र नगर निगम और ग्राम पंचायतों के नाम से तैयार कराए व जीवित व्यक्तियों को मृत बताकर फर्जी नामिनी दर्शाए कराया। तद्पश्चात बीमा क्लेम की राशि अपने या सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कर ली।
किन मामलों में फर्जी क्लेम पकड़े गए
सूत्रों अनुसार जांच के दौरान स्टार यूनियन दाईची लाइफ इंश्योरेंस कंपनी से प्राप्त 50 मामलों में से 6 संदिग्ध मामलों की विस्तृत जांच की गई, जिनमें –
- विकास सुमन – जीवित रहते हुए फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाकर 2 लाख की राशि हड़पी गई
- हेमलता – ग्राम पंचायत से फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर क्लेम निकाला गया
- कमलेश सिंघल – जीवित व्यक्ति को मृत दिखाकर बीमा राशि पत्नी के खाते में ट्रांसफर
- मुकेश वंशकार – फर्जी नामिनी बनकर बीमा राशि प्राप्त की गई
कुछ मामलों में जिन व्यक्तियों को मृत बताया गया, वे जांच के दौरान पूरी तरह जीवित पाए गए।
कौन-कौन आरोपी
प्राथमिक जांच में जिन आरोपियों की संलिप्तता सामने आई है, उनमें से दीपमाला मिश्रा, जिग्नेश प्रजापति, नवीन कुमार मित्तल और पूजा कुमारी शामिल है। इसके अलावा नगर निगम ग्वालियर की जन्म-मृत्यु शाखा के तत्कालीन कर्मचारी और यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, श्योपुर के तत्कालीन कर्मचारी की भूमिका भी संदिग्ध पाई गई है। आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता 2023 की धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जिसमें 318 (2) – धोखाधड़ी, 319 (2) – प्रतिरूपण, 336 (3) – कूटरचित दस्तावेज, 338 – मूल्यवान संपत्ति से संबंधित कूटरचना, 340 (2) – कूटरचित दस्तावेजों का उपयोग और 61 (2) – आपराधिक षड्यंत्र है।
कितनी राशि की हुई ठगी
जानकारी में पता चला है कि अब तक की जांच में कम से कम 10 लाख रुपये की सरकारी बीमा राशि के गबन की पुष्टि हो चुकी है। वहीं EOW का कहना है कि यह आंकड़ा आगे और भी बढ़ सकता है क्योंकि अन्य संदिग्ध मामलों की जांच अभी जारी है।
EOW का रुख
वहीं मामले पर आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ के अधिकारियों का कहना है कि- यह मामला केवल व्यक्तिगत धोखाधड़ी नहीं, बल्कि सरकारी योजना के दुरुपयोग का संगठित अपराध है। मामले में आगे और गिरफ्तारियां तथा बैंक व नगर निगम स्तर पर कार्रवाई की संभावना है। प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना जैसे कल्याणकारी कार्यक्रम में हुआ यह फर्जीवाड़ा सरकारी सिस्टम की निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े करता है। EOW भोपाल द्वारा जांच जारी है और दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।


