बालाघाट। केंद्र सरकार द्वारा लाल आतंक को देश से मार्च 2026 तक पूर्णतः समाप्त करने की डेड लाईन आने से पहले ही माओवादियों में दहशत का माहौल है। जहां बालाघाट में कुछ दिन पहले ही 10 नक्सलियों ने मुख्यमंत्री मोहन यादव के सामने हथियार छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का संकल्प लिया था। वहीं अब दो और नक्सलियों ने नक्सल का रास्ता छोड़ने का फैसला गुरुवार को किया। मिल रही जानकारी के अनुसार नक्सली दीपक और रोहित ने सरेंडर भी सरकार की योजनाओं से प्रभावित होकर खून-खराबे का रास्ता छोड़ दिया। बताया जा रहा है कि बिरसा थाना क्षेत्र के कोरका सीआरपीएफ कैंप में दोनों नक्सलियों ने गुरुवार को हथियार डाले हैं। बतादें कि लंबे समय से नक्सल गतिविधियों में यह दोनों सक्रिय थे। अमित शाह की अगुवाई में चल रहे लाल आतंक के सफाया वाले अभियान के चलते नक्सलियों की घेराबंदी सुरक्षा एजेंसियां कर रही हैं। लिहाजा अब परिणाम साफ तौर पर दिखाई देने लगे हैं। एक सप्ताह में ही मध्यप्रदेश के सबसे नक्सल प्रभावित क्षेत्र बालाघाट में नक्सलियों द्वारा सरेंडर करने की यह दूसरी घटना है।
एक बार फिर बालाघाट में दो नक्सलियों ने डाले हथियार, मुख्यधारा में लौटने का किया फैसला


