जंगलों में लकड़ी माफियाओं की बढ़ी सक्रियता, फर्जी टीपी से चल रहा लकड़ी का कारोबार

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शहडोल। जिले में जंगलों से इमारती लकड़ी चोरी कोई नई बात नहीं है। आए दिन लकड़ी माफियाओं का पर्दाफाश होना इसकी पुष्टि करता है। शुक्रवार को भी खैर और सागौन जैसी बेशकीमती लकड़ी वन विभाग ने पकड़ी है। वन विभाग की हालियां कार्रवाई ने इस अवैध कारोबार की परतें खोल दीं और पूरे नेटवर्क की नींव हिला दी।
खैर लकड़ी की बढ़ती मांग ने तस्करी को नया बाजार दे दिया है। इसी कड़ी में शहडोल वन विभाग ने एक सुनियोजित अभियान के तहत खैर और सागौन की अवैध तस्करी में लिप्त नेटवर्क पर बड़ी चोट की है। कार्रवाई तीन अलग-अलग स्थानों पर की गई, जहां लाखों की लकड़ी और उपकरण जब्त किए गए।
वन परिक्षेत्र बुढ़ार के ग्राम बुगरा में राम प्रवेश यादव के परिसर से 104 नग सागौन लकड़ी बरामद की गई। पूछताछ में सामने आया कि लकड़ी रात के अंधेरे में पिकअप वाहन से लाई गई थी। इस मामले में वन अपराध प्रकरण दर्ज कर लिया गया है।
दूसरी कार्रवाई ब्यौहारी वन परिक्षेत्र के कोलमी वार्ड में अशोक कुमार अवस्थी के निवास पर हुई। यहां सागौन के छिलन से भरे पांच बोरे, दो लकड़ी के टुकड़े, एक बैटरी चालित चेन-सॉ मशीन और 13 चेन-सॉ जब्त की गईं। इससे अंदाजा लगाया जा रहा है कि यह केवल भंडारण नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग और सप्लाई का भी केंद्र था। तीसरी रेड ग्राम पटदई में सुनील अवस्थी के ढाबा परिसर में हुई, जहां से 130 नग सागौन लकड़ी मिली। दोनों भाइयों के ठिकानों से कुल मिलाकर खैर और सागौन की लगभग 5 से 6 घन मीटर लकड़ी जब्त की गई।

वन विभाग की अधिकारी श्रद्धा पेंद्रे ने बताया कि खैर लकड़ी की कीमत बढ़ने से अब केवल तने ही नहीं, बल्कि छिलके और जड़ों तक की तस्करी होने लगी है। फर्जी ट्रांजिट परमिट (टीपी) के जरिए लकड़ी को वैध दिखाकर देशभर में सप्लाई किया जा रहा था।