भोपाल। स्विट्ज़रलैंड के दावोस में हुए विश्व आर्थिक मंच-2026 में मध्यप्रदेश ने केवल अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं कराई, बल्कि निवेश, हरित ऊर्जा और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में खुद को भविष्य के राज्य के रूप में प्रस्तुत कर वैश्विक मंच पर नई पहचान बनाई।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विश्व आर्थिक मंच-2026 के दौरान मध्यप्रदेश की निवेश-अनुकूल नीतियों, स्थिर प्रशासन और दीर्घकालिक विकास दृष्टि को अंतरराष्ट्रीय निवेशकों के सामने प्रभावी ढंग से रखा। उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल उनकी नहीं, बल्कि प्रदेश के साढ़े आठ करोड़ नागरिकों की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व थी।
दावोस के मंच से यह स्पष्ट संदेश दिया गया कि मध्यप्रदेश उद्योग, ऊर्जा, कृषि, पर्यटन, शिक्षा और नवाचार जैसे क्षेत्रों में अपार संभावनाओं से भरा राज्य है। विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और स्वच्छ विकास पर राज्य की रणनीति ने वैश्विक निवेशकों का भरोसा जीता। मुरैना की बैटरी भंडारण परियोजना और चौबीसों घंटे नवीकरणीय ऊर्जा आपूर्ति मॉडल को अंतरराष्ट्रीय उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया गया।
जापान के अंतरराष्ट्रीय सहयोग बैंक के साथ येन ऋण और सौर ऊर्जा निवेश पर चर्चा हुई, वहीं देश की बड़ी औद्योगिक कंपनियों के साथ जैव-ऊर्जा और विनिर्माण क्षेत्र में साझेदारी की संभावनाएँ तलाशी गईं। इस्राइल नवाचार प्राधिकरण के साथ क्वांटम तकनीक, शिक्षा तकनीक, रक्षा तकनीक और जल प्रबंधन में सहयोग पर सहमति बनी।
सूचना प्रौद्योगिकी और गहन तकनीक के क्षेत्र में साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अगली पीढ़ी की तकनीकों पर भी निवेश वार्ता हुई। पर्यटन को लेकर राज्य की विरासत, वन्यजीव और आध्यात्मिक पहचान को वैश्विक ब्रांड बनाने की योजना रखी गई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल पूंजी आकर्षित करना नहीं, बल्कि युवाओं को रोजगार, किसानों को समृद्धि और महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है। दावोस यात्रा ने मध्यप्रदेश को एक भरोसेमंद, भविष्य-तैयार और हरित विकास की ओर बढ़ते राज्य के रूप में विश्व मानचित्र पर मजबूती से स्थापित किया है।
दावोस में मध्यप्रदेश का दमदार संदेशः निवेश, हरित ऊर्जा और रोजगार का वैश्विक खाका


