नई दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट के इतिहास में बुधवार को एक अभूतपूर्व दृश्य देखने को मिला है। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अदालत में खुद खड़े होकर अपने राज्य से जुड़े एसआईआर (Special Intensive Revision) मामले पर पक्ष रखा। बता दें ऐसा पहली बार हुआ है जब किसी मौजूदा मुख्यमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट में सीधे तौर पर बहस में हिस्सा लिया है।
आगे नजर आई ममता बनर्जी
सूत्रों अनुसार सुनवाई के दौरान ममता बनर्जी वकीलों की कतार में सबसे आगे बैठीं नजर आईं और उन्होंने अदालत से लोकतंत्र की रक्षा की अपील भी की। उन्होंने कहा कि बंगाल से जुड़े मामलों में न्याय मिलने में कठिनाई हो रही है और कई बार उठाए गए सवालों का जवाब तक नहीं दिया जा रहा। मुख्यमंत्री ने अदालत को बताया कि उनकी सरकार और पार्टी लगातार चुनाव आयोग को पत्र लिख रही है, लेकिन संतोषजनक प्रतिक्रिया नहीं मिल रही है। साथ ही यह भी आरोप लगाया कि कुछ मामलों में मतदाता सूची से नाम हटाए जा रहे हैं, जिससे आम नागरिकों के अधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश ने दिया आश्वासन
मुख्यमंत्री की इस बात को लेकर मुख्य न्यायाधीश (CJI) ने आश्वस्त किया कि अदालत उनकी चिंताओं को गंभीरता से ले रही है। साथ ही सीजेआई ने कहा कि- हर समस्या का समाधान संभव है और अदालत इस मामले में संतुलित फैसला देने का प्रयास करेगी।
मतदाता सूची को लेकर आरोप
वहीं ममता बनर्जी ने यह भी कहा कि शादी के बाद दूसरे स्थान पर रहने वाली कई महिलाओं के नाम मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जा रहे हैं, जो बेहद चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ राज्यों को चुनिंदा तौर पर निशाना बनाया जा रहा है।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भाषा या नामों की वर्तनी में अंतर के कारण किसी भी नागरिक को मतदाता सूची से बाहर नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने भरोसा दिलाया कि सभी पहलुओं पर विचार कर उचित दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।


