येरूशलम। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने दो दिवसीय दौरे पर इजरायल पहुंचे, जहां उनका असाधारण और गर्मजोशी भरा स्वागत हुआ। यरूशलम में इजरायली संसद नेसेट को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने भारत-इजरायल रिश्तों को “विश्वास, नवाचार और साझा मूल्यों” की साझेदारी बताया। अपने भाषण में उन्होंने कहा कि भारत और इजरायल हर चुनौतीपूर्ण दौर में एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हैं और भविष्य में यह सहयोग और गहराएगा।
जानकारी के मुताबिक, पीएम मोदी ने गाजा शांति पहल का समर्थन करते हुए इसे पूरे क्षेत्र के लिए “न्यायपूर्ण और टिकाऊ समाधान” की दिशा में अहम कदम बताया। उन्होंने एक भावनात्मक संदर्भ देते हुए कहा कि 17 सितंबर 1950, जिस दिन उनका जन्म हुआ, उसी दिन भारत ने इजरायल को औपचारिक मान्यता दी थी। उन्होंने इजरायल को “फादरलैंड” और भारत को “मदरलैंड” बताते हुए दोनों देशों के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों पर गर्व जताया।
मोदी ने दी श्रद्धांजलि
बता दें दौरे के दौरान पीएम मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने विश्व होलोकॉस्ट स्मृति केंद्र याद वाशेम का संयुक्त दौरा किया। यहां पीएम मोदी ने होलोकॉस्ट के पीड़ितों को श्रद्धांजलि अर्पित की और मानवता के इतिहास के उस काले अध्याय को याद किया।
एशिया का शेर- नेतन्याहू
वहीं नेसेट में पीएम मोदी के संबोधन के दौरान कई बार स्टैंडिंग ओवेशन दिया गया। “मोदी-मोदी” के नारों के बीच इजरायली सांसदों ने उनका अभिवादन किया। नेतन्याहू ने उन्हें “एशिया का शेर” बताते हुए भारत-इजरायल संबंधों को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का श्रेय दिया।
यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव बढ़ा हुआ है। ऐसे परिदृश्य में भारत और इजरायल के बीच रणनीतिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, टेक्नोलॉजी एक्सचेंज और कूटनीतिक तालमेल को नई दिशा देने के संकेत मिले हैं। पीएम मोदी का यह दौरा दोनों देशों के रिश्तों को अगले स्तर पर ले जाने की मजबूत पहल के रूप में देखा जा रहा है।


