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बिहार कैबिनेट विस्तार में ब्रेक: चुनाव नतीजों के बाद ही होगा फैसला?

पटना। बिहार में नई सरकार बनने के बाद जिस कैबिनेट विस्तार का इंतजार था, वह फिलहाल टलता नजर आ रहा है। सम्राट चौधरी की अगुवाई वाली सरकार अब रणनीतिक कारणों से विस्तार को होल्ड पर रख सकती है।

क्यों टल रहा है कैबिनेट विस्तार?

सूत्रों के मुताबिक, यह देरी सिर्फ प्रशासनिक नहीं बल्कि पूरी तरह “पॉलिटिकल कैलिब्रेशन” का हिस्सा है। जिसमें पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों के चुनाव नतीजे 4 मई को आएगें। बीजेपी के कई सीनियर नेता अभी चुनावी कैंपेन में व्यस्त हैं, जिससे नामों की फाइनल लिस्ट पर अभी सहमति नहीं बन पाई है। यानी, कैबिनेट विस्तार अब “इलेक्शन रिजल्ट के बाद” ही संभव माना जा रहा है।

अभी कौन संभाल रहा है सरकार?

फिलहाल सरकार “लीन स्ट्रक्चर” में काम कर रही है:

  • मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पास 29 विभाग
  • डिप्टी सीएम विजय कुमार चौधरी को 10 विभाग
  • डिप्टी सीएम बिजेंद्र प्रसाद यादव के पास 8 विभाग

इतने बड़े विभागीय भार के कारण फैसलों की गति पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

 मंत्री पद का गणित

बता दें एनडीए के अंदर एक नया “सीट-टू-मिनिस्टर रेशियो” लागू हो सकता है जिसमें

  • हर 5 विधायक पर 1 मंत्री का फॉर्मूला
  • बीजेपी के लगभग 15 मंत्री
  • जेडीयू के 15–16 मंत्री (डिप्टी सीएम सहित)
  • सहयोगी दलों को भी सीमित लेकिन अहम हिस्सेदारी

यह गणित अभी फाइनल नहीं है, लेकिन बातचीत इसी दिशा में आगे बढ़ रही है। इस बार सिर्फ राजनीतिक संतुलन ही नहीं, बल्कि “परफॉर्मेंस मैट्रिक्स” भी अहम फैक्टर हो सकता है।

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