ईरान। मिडिल ईस्ट में हालात तेजी से गंभीर होते जा रहे हैं। Israel ने Iran पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले शुरू कर दिए हैं। वहीं United States ने भी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी और मजबूत कर दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने अपना तीसरा एयरक्राफ्ट कैरियर USS George H.W. Bush मिडिल ईस्ट की ओर रवाना कर दिया है। इसके साथ ही क्षेत्र में अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की संख्या तीन हो जाएगी, जिसे रणनीतिक तौर पर बेहद अहम माना जा रहा है।
तीन अमेरिकी कैरियर स्ट्राइक ग्रुप्स की तैनाती
अमेरिकी नौसेना के मुताबिक USS George H.W. Bush को पूर्वी भूमध्य सागर की दिशा में भेजा जा रहा है। इससे पहले USS Gerald R. Ford स्वेज नहर पार कर रेड सी में प्रवेश कर चुका है, जबकि USS Abraham Lincoln पहले से ही इस इलाके में ऑपरेशनल ड्यूटी पर तैनात है।
तीनों कैरियर समूहों की मौजूदगी को अमेरिका की हाल के वर्षों में इस क्षेत्र में सबसे बड़ी नौसैनिक तैनाती माना जा रहा है।
इजरायल के ‘Extensive Strikes’
Israel ने पुष्टि की है कि उसने Iran के कई अहम ठिकानों पर “Extensive Strikes” यानी बड़े पैमाने पर हमले शुरू किए हैं। इन हमलों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ गया है और क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता भी गहरा गई है।
अमेरिका का रणनीतिक संदेश
वहीं अमेरिका की बढ़ती नौसैनिक तैनाती दरअसल ईरान को स्पष्ट संदेश देने की रणनीति का हिस्सा है। इसे “Full Spectrum Deterrence” कहा जा रहा है, यानी किसी भी संभावित संघर्ष की स्थिति में तुरंत जवाब देने की पूरी तैयारी। जानकारी के मुताबिक, USS George H.W. Bush पर तैनात स्ट्राइक फाइटर जेट और गाइडेड मिसाइल डेस्ट्रॉयर जरूरत पड़ने पर Yemen में ईरान समर्थित हौथी ठिकानों को भी निशाना बना सकते हैं। खासकर तब, जब वे Israel या अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार मार्गों पर हमला करने की कोशिश करें।
समुद्री मार्गों पर बढ़ी चिंता
वहीं रेड सी और आसपास के समुद्री रास्ते पहले से ही तनाव के केंद्र में हैं। इन मार्गों से दुनिया के बड़े हिस्से का व्यापार गुजरता है, इसलिए किसी भी सैन्य टकराव का असर वैश्विक सप्लाई चेन और तेल बाजार पर भी पड़ सकता है।


