इस्लामाबाद में शांति की कोशिश, होर्मुज में टकराव: अमेरिका-ईरान रिश्तों में दोहरी तस्वीर

इस्लामाबाद। एक तरफ कूटनीतिक मंच पर शांति की बातचीत जारी है, वहीं दूसरी ओर समुद्री मोर्चे पर अमेरिका और ईरान के बीच तनाव खुलकर सामने आ रहा है। हालिया घटनाक्रम यह संकेत दे रहा है कि बातचीत और वास्तविक हालात के बीच बड़ा अंतर बना हुआ है।

नए दूत, नई रणनीति

अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत को लेकर गतिविधियां तेज हैं। अमेरिका की ओर से जे.डी. वेंस की जगह विशेष वार्ताकार भेजे गए है और जेरेड कुशनर और स्टीव विटकॉफ को इसकी जिम्मेदारी दी गई। वहीं ईरान ने सीधे प्रतिनिधि भेजने के बजाय पाकिस्तान के जरिए संदेश पहुंचाने की रणनीति अपनाई। यह संकेत देता है कि दोनों देश अभी भी सीधे संवाद से बचते हुए ‘बैकचैनल डिप्लोमेसी’ का सहारा ले रहे हैं।

होर्मुज में टकराव

जहां बातचीत में नरमी दिख रही है, वहीं होर्मुज जलडमरूमध्यमें हालात उलटे नजर आ रहे हैं। ईरान की इस्लामिक क्रांतिकारी गार्ड कोर(IRGC) ने ‘Epaminodes’ नामक जहाज को हिरासत में लिया है। जिस पर आरोप है कि अमेरिकी सहयोग और समुद्री नियमों का उल्लंघन कर रहा था। अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए यूएसएस राफेल पेराल्टा (DDG-115) के जरिए एक ईरानी जहाज को रोका यह घटनाएं बताती हैं कि समुद्री क्षेत्र अब भी दोनों देशों के बीच शक्ति प्रदर्शन का बड़ा मंच बना हुआ है।

कई जहाज निशाने पर

ईरान की ओर से हाल ही में कई और जहाजों को जब्त किया गया:

  • MSC Francesca
  • Epaminondas
  • ग्रीक स्वामित्व वाला ‘Euphoria’

जिसको लेकर IRGC का आरोप है कि इन जहाजों ने नेविगेशन सिस्टम में छेड़छाड़ की। साथ ही बिना अनुमति संचालन किया और क्षेत्रीय सुरक्षा को खतरे में डाला। ईरान ने साफ कहा है कि होर्मुज में किसी भी तरह की सुरक्षा चूक उसकी रेड लाइन है।

व्यापार और तेल सप्लाई पर खतरा

बता दें होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण शिपिंग रूट्स में से एक है, जहां से वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा गुजरता है। किसी भी तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ सकता है। जिससे तेल कीमतों में उछाल और व्यापार बाधित होने की आशंका है। भारत जैसे देशों के लिए भी यह रणनीतिक चिंता का विषय है।

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